चिरैया वेबसीरीज सनातनी पारिवारों का वैवाहिक जीवन बर्बाद करने का वामपंथी षड्यंत्र,
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क्या कोई जागरूक महिलावादी डायरेक्टर/प्रोडूसर “हलाला प्रथा” पर वेबसीरीज बनाने की हिम्मत दिखा सकता है? – डॉ उदिता त्यागी
*महाकाली वाहिनी के तत्वाधान में डीएम कार्यालय गाजियाबाद पर वेबसीरीज चिरैया को बैन करने के लिए किया गया विरोध प्रदर्शन*
ग्राउंड रिपोर्ट। रविंद आर्य
गाजियाबाद सिटी
वामपंथी एजेंडा से प्रेरित “चिरैया” वेबसीरीज में सनातन विवाह के संबंधों पर कुठाराघात करते हुए “मैरिटल रेप”की धारणा को सही साबित लिए ग़लत आँकड़े प्रस्तुत करके सनातनी पुरुषों के प्रति समाज में घृणा फैला कर वैवाहिक संस्था को तोड़ने की साज़िश की जा रही है। आज बड़ी संख्या में महाकाली वाहिनी की महाकालियों के द्वारा इसका विरोध डीएम कार्यालय पर किया गया।
सनातन धर्म पर रोज़ाना सिनेमा में अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर वामपंथियों द्वारा प्रोपोगंडा फ़िल्म /सीरीज के माध्यम से फेक नैरेटिव चलाए जा रहे हैं।
जिसका शिकार मासूम सनातनी महिलाये और बच्चियाँ हो रही हैं।इन प्रोपोगैंडा में फँस कर महिलाये अपने परिवारों को छोड़ रही हैं,नवविवाहिताएं अपने पतियों की हत्या कर रही हैं,लड़कियां लव जिहाद में फँस रही हैं।
डॉ उदिता त्यागी ने बताया कि वामपंथियों द्वारा सनातनी परंपराओं पर प्रहार किया जा रहा है।समाज में मासूम बच्चियों के मन में विवाह और पति के प्रति घृणा का भाव रोपा जा रहा है।
उन्होंने पूछा क्या हलाला प्रथा पर किसी वामपंथी की हिम्मत है वेबसीरीज बनाने की?
क्या हलाला रेप की श्रेणी में नहीं आता?
क्या सनातन धर्म इतना कमजोर हो गया है की कोई भी हमारे रीति रिवाजों पर प्रोपोगंडा चला कर हमारे बच्चों को गुमराह कर सकता है?
सीरीज में एक सनातनी परिवार के माध्यम से ये सब दिखाया गया है जिस से निर्माता/निर्देशक की दुर्भावना का पता चलता है।
वाहिनी के द्वारा डीएम साहब के माध्यम से प्रधानमंत्री जी को लिखे गए पत्र में ओओटी प्लेटफार्म के लिए कड़े सेंसरशिप नियमों को बनाने की मांग की गई।
फ़िल्म के प्रोडूसर, डायरेक्टर,और राइटर पर महाकाली वाहिनी के द्वारा एफ आई आर भी कविनगर थाने में करवाई गई।
वेबसीरीज में सनातनी पुरुषों को राक्षसों के रूप में प्रस्तुत किया गया है और महिला पुरुष के वैवाहिक संबंधों को मैरिटल रेप की श्रेणी में लाकर कानून बनाने की बात कही गई है
विरोध प्रदर्शन में उपस्थित निशि त्यागी,
रीना त्यागी, सुमन उपाध्याय और गीता त्यागी, शिरोमणि त्यागी, पूजा शर्मा, ज्योतित्यागी, नीता राय ने सीरीज पर आपत्ति जताते हुए सेंसर बोर्ड से सीरीज को बैन करने की माँग की।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया मुख्य रूप से शैलज सिन्हा, डॉ. रचनाशाही, शैलजा शुक्ला, ज्योति चौधरी, मंजू श्रीवतस्तव, सुधाशुक्ला, कुसूमगोसाईं, पलक गुप्ता, सोनिया पांडे, आशा, बहन पूनमपांडे, सीतावर्मा, मोनिकागुप्ता, प्रीति मेहरा, पद्मागोसाईं, आंचल, शोभा, सोनिया, शालिनी, पूनम, कौशल, निधि राय, बबीता, तोशी श्रीवतास्तव, सरोज, सुनीता, सरोज उपस्थित रहीं।
यह विरोध सनातन वैवाहिक संस्था के रक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों की कड़ी है।
डॉ उदिता त्यागी
राष्ट्रीय समन्वयक
महाकाली वाहिनी
*“चिरैया” वेबसीरीज़: जानकारी और विवाद का कारण*
वेबसीरीज़ क्या है?
“चिरैया” एक नई हिंदी वेबसीरीज़ बताई जा रही है, जो वैवाहिक संबंधों, महिलाओं के अधिकारों और घरेलू जीवन के संवेदनशील मुद्दों पर आधारित है। इसकी कहानी मुख्यतः एक विवाहित महिला के अनुभवों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें विवाह के भीतर होने वाले मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक संबंधों की जटिलता को दिखाया गया है।
*मुख्य विषय (Themes)*
वैवाहिक संबंधों में सहमति (consent)*
महिलाओं की स्वतंत्रता और अधिकार
घरेलू हिंसा और मानसिक दबाव
“मैरिटल रेप” (वैवाहिक बलात्कार) पर बहस
*“मैरिटल रेप” क्या है?*
मैरिटल रेप का अर्थ है—विवाह के भीतर बिना सहमति के बनाए गए शारीरिक संबंध। भारत में यह मुद्दा कानूनी और सामाजिक बहस का विषय है, क्योंकि भारतीय कानून (IPC) में अभी भी इसे पूर्ण रूप से अपराध की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है (कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर)।
*विरोध क्यों हो रहा है?*
आपके दिए गए बयान के अनुसार विरोध करने वाले संगठनों के प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:
*सनातन विवाह पर हमला*
आरोप है कि वेबसीरीज़ में पारंपरिक हिन्दू (सनातन) विवाह व्यवस्था को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिससे समाज में इसकी छवि खराब होती है।
*गलत आँकड़ों का इस्तेमाल*
विरोध करने वालों का कहना है कि “मैरिटल रेप” जैसे मुद्दे को स्थापित करने के लिए वेबसीरीज़ में भ्रामक या अतिरंजित आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।
*पुरुष विरोधी नैरेटिव*
यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि इसमें सनातनी पुरुषों को एकतरफा नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिससे समाज में पुरुषों के प्रति घृणा पैदा हो सकती है।
(घ) वैवाहिक संस्था को कमजोर करना
कुछ संगठनों का मानना है कि ऐसी सामग्री भारतीय पारिवारिक व्यवस्था और विवाह संस्था को तोड़ने का काम करती है।
*दूसरा पक्ष (समर्थन में तर्क)*
दूसरी ओर, ऐसे कंटेंट के समर्थक यह कहते हैं कि:
यह वेबसीरीज़ महिलाओं के वास्तविक अनुभवों और समस्याओं को सामने लाने का आप्रयास है।
समाज में जिन मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं होती, उन पर संवाद जरूरी है।
यह किसी धर्म विशेष पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक यथार्थ को दिखाने का माध्यम है।
“चिरैया” वेबसीरीज़ को लेकर विवाद मुख्यतः दो विचारधाराओं के टकराव का परिणाम है—
एक पक्ष इसे सामाजिक सुधार और महिलाओं की आवाज़ मानता है
जबकि दूसरा पक्ष इसे सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ एजेंडा मान रहा है

