रुदावली में ‘कागजी विकास’ का खेल, अधिकारियों की मौजूदगी में भी खुला फर्जीवाड़ा
1 min readमाधौगढ़ (जालौन)। विकास खंड नदीगांव की ग्राम पंचायत रुदावली में विकास कार्यों के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। 12 शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्र देकर इंटरलॉकिंग, नाली और बंधा निर्माण में लाखों रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, बंधा निर्माण केवल कागजों में दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि मौके पर कोई निर्माण नहीं मिला। जांच की भनक लगते ही 2–3 दिन पहले आनन-फानन में मजदूर लगाकर काम दिखाने की कोशिश की गई। इंटरलॉकिंग और नाली निर्माण में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। एक ही कार्य के लिए दो-दो बार भुगतान किया गया, जबकि कई स्थानों पर काम अधूरा पड़ा है। कहीं इंटरलॉकिंग पर मिट्टी डाल दी गई तो कहीं नाली निर्माण अधर में छोड़ दिया गया, लेकिन भुगतान पूरा निकाल लिया गया। मामले में एपीओ और तकनीकी सहायक (टीए) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि बिना स्टीमेट और आईडी जनरेट किए ही भुगतान कर दिया गया। इससे पूरे मनरेगा तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गंभीर बात यह है कि इस मामले की पहले भी तीन बार जांच हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बार जांच के लिए पहुंचे जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, मंडलीय प्राधिकरण टीएसी के हिम मुहम्मद शाह आलम और कोषाधिकारी विजय शर्मा ने शिकायतों के बावजूद केवल एक-दो कार्यों की ही जांच की और अधूरी जांच छोड़कर मौके से लौट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि 10–12 कार्यों की शिकायत के बावजूद जांच सीमित कर दी गई, जिससे पूरे मामले को दबाने की कोशिश नजर आती है। गांव में अंबेडकर मार्ग जर्जर हालत में है, नाली निर्माण अधूरा पड़ा है, लेकिन कागजों में विकास कार्य पूरे दिखाए जा रहे हैं। ग्राम प्रधान जाकिर हुसैन और सचिव रोहित कुमार ने आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि सभी कार्य कराए गए हैं। लगातार शिकायतों, तीन बार जांच और फिर भी कार्रवाई न होने से अब यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बन गया है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


