मुंबई में कथित फेरीवाला परवाना घोटाले की जांच के आदेश, हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगी रिपोर्ट
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मुंबई में फेरीवालों के पंजीकरण और क्यूआर कोड वितरण प्रक्रिया के बीच कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। न्यायालय ने कथित फर्जी अथवा नियमविरुद्ध फेरीवाला परवानों की जांच के लिए पुलिस और संबंधित प्रशासनिक विभागों को निर्देश जारी किए हैं।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आशीष दुबे ने गोरेगांव क्षेत्र में फेरीवाला पंजीकरण से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा न्यायालय के समक्ष उठाया। उन्होंने दावा किया कि गोरेगांव स्टेशन रोड क्षेत्र में एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों को नियमों के विपरीत फेरीवाला पात्रता प्रदान की गई है। इस संबंध में उन्होंने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ये फर्जी फेरी वाले करोड़ों के दुकान के मालिक भी हैं। उसके बावजूद भी इन्हें पात्रता कैसे मिली यह जांच का विषय हैं।
बताया जाता है कि बीएमसी द्वारा सत्यापित लगभग लगभग १ लाख पात्र फेरीवालों को क्यूआर कोड एवं पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में थी। इसी दौरान उठाए गए आरोपों के कारण न्यायालय ने पूरे मामले की जांच आवश्यक मानते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
हाईकोर्ट ने गोरेगांव पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जांच करने तथा १४ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है तथा यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा अथवा नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ता आशीष दुबे का कहना है कि यदि व्यापक स्तर पर जांच की जाए तो फेरीवाला पात्रता प्रक्रिया में और भी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं, जिससे पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित होगी और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
मुंबई में अवैध फेरीवालों, परवाना प्रणाली और फेरीवाला सर्वेक्षण को लेकर पहले भी हाईकोर्ट प्रशासन और महापालिका को कड़ी फटकार लगा चुका है। न्यायालय ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि केवल पात्र और वैध फेरीवालों को ही संरक्षण दिया जा सकता है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
अब इस मामले में पुलिस और प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो फेरीवाला पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े स्तर पर जांच और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

