भारत के कानून और राजनेताओं में इच्छाशक्ति की कमी के कारण भी भारत में इस्लामिक कट्टरता काबू से बाहर होती जा रही है.:: भवानजी
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवम मुंबई के एक्स डेप्युटी मेयर बाबुभाई भवानजीने एक प्रसिद्धि पत्र में बताया की तृणमूल कांग्रेस के नेता और कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम कहते हैं की जो इस्लाम में पैदा नहीं हुए, बदकिस्मत हैं उन्हें इस्लाम में लाना होगा और अगर हम ऐसा करेंगे तो अल्लाह खुश होगा.
यानी उन्होंने खुले तौर पर सभी को दीन की दावत दे दी है. अभी तक उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही शुरू नहीं हुई है. लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाकर देश में कोरोना फैलाने वाले तब्लीगी जमात के मौलाना साद के विरुद्ध सरकार ने क्या किया, कुछ पता नहीं.
सरकारी भूमि पर बनाया गया तब्लीगी जमात का अवैध निर्माण आज भी ज्यों का त्यों खड़ा है. बरेली के मौलाना तौकीर रजा कहते हैं कि आज कुत्तों के दिन हैं, कल हमारे भी आयेंगे और उनका कुछ नहीं बिगड़ता.
(हिंदुओं को अपने बारे में बन रही धारणा को बदलना होगा कि वे डरपोक और पलायनवादी होते हैं और आलू, प्याज और पेट्रोल के दाम में ही उलझे रहते हैं तथा राष्ट्रहित में एकजुट होकर मतदान नहीं करते.)
((मुसलमान कोम अपने मज़हब की रक्षा और उसका फैलावा करता है ))
((पूरी दुनियां में मुसलमान हमेशा एकजुट होकर इस्लाम को सर्वोपरि रखते हुए वोट करते है. ….)))
(((पीडीए के नाम पर दलित और पिछड़े वर्ग के जो लोग मुस्लिमों के साथ एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं उन्हें जोगेंद्र नाथ मंडल के जीवन से सबक लेना चाहिए जो 1930 में मुस्लिम में शामिल हुए थे और विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन वहाँ दलितों पर हो रहे अत्याचार और धर्मान्तरण पर उनकी एक नहीं सुनी गई उल्टे उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया गया. इतना अपमानित होकर उन्हें हिंदू और मुसलमान के बीच का अंतर समझ में आया और तब वह भारत लौट आए लेकिन उन्होंने अपना, दलितों, हिंदुओं और हिंदुस्तान का इतना अधिक नुकसान किया था जिसकी पीड़ा वह मरते दम तक नहीं भुला सके.)))

