महाराष्ट्र पुलिस में सुधार कब। ?
वी बी माणिक
मुंबई राज्य सरकार प्रतिदिन नए नए नारे लगा रहे हैं फिर भी सुधार के बजाय बिगड़ता ही जा रहा है पुलिस जिस निरीक्षको ने टेंडर भरा उसकी पोस्टिंग अच्छे जगहों पर कर दिया गया और जिसने टेंडर नहीं भरा वह साइड में चला गया यह लुट का खेल कब तक फडणवीस जी महाराष्ट्र पुलिस महासंचालक सदानंद दाते को महाराष्ट्र का मुखिया बनाकर क्या फडणवीस ने कोई भूल किया है या टेंडर का रेट बढ़ाने के लिए किया है जो कि प्रशांत बुरडे जो दाते से सीनियर थे फिर भी उनको रेलवे का महासंचालक बनाया पर बुर डे रेलवे को संभालने में काफी असमर्थ थे इनके कार्यकाल में पुलिस कर्मियों में काफी लापरवाही बढ़ी है पुलिस में पारदर्शिता नहीं है कोई सुनवाई नहीं होती है ये तो भगवान का शुक्र है कि रेलवे में एक अधिकारी आयुक राकेश क्लासगर को भेज दिया है इससे पुलिस कर्मियों में कुछ डर है नहीं तो ये अब पुलिस विभाग को कभी का बेच दिया होता बुरडे अयोग्य साबित हो रहे अधिकांश निरीक्षक अपनी बदली को रोकने की जुगाड़ में लगे है पर क्या होगा कितना टेंडर आएगा यह समय बताएगा इसके अलावा डीजी रेलवे और डीजी मुख्यालय के अलावा कितने एसआई ए एसआई हवलदार सिपाही जो करीब पिछले 12 से 15 वर्षों से कार्यरत है इनको हटाने के लिए कौन सा नियम लागू होगा इस पर कार्रवाई कौन करेगा क्या इसका जवाब बुरडे देंगे या अपने रिटायर्ड होने का इंतजार कर है सूत्रों से पता चला है कि बुरडे लंबी छुट्टी पर चले गए है पुलिस को सुधारने के लिए अब कौन सा फार्मूला आएगा पुलिस विभाग में लुट कब बंद होगा पुलिस वाले में सभ्यता कब आएगी ये काफी बड़ा प्रश्न है क्या इस विषय पर राज्य के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ध्यान देंगे या कांग्रेस और शिवसेना की तरह ईमानदारी का ढोल बजाएंगे



