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April 16, 2026

Right Media Samachar

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प्रेस विज्ञप्ति

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  • सामाजिक धार्मिक संस्कारों मान्यताओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है — यशवंत सिंह चौहान

नई दिल्ली 4 अप्रैल / भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं सामाजिक मान्यताओं के अनुरूप सभी सैलरीड कर्मचारियों के लिए सहवेतन शोक अवकाश की मांग करते हुए माननीय भूपेन्द्र यादव
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री को
पत्र लिखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर यशवंत सिंह चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय कॉलेज कर्मचारी परिषद सम्बंधित – भारतीय मजदूर संघ, दिल्ली विश्वविद्यालय इकाई की ओर से सविनय निवेदन है कि भारत एक प्राचीन एवं समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं वाला देश है, जहाँ परिवार, संस्कार, श्रद्धा एवं धार्मिक कर्तव्यों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हमारी संस्कृति में माता-पिता एवं परिजनों के प्रति कर्तव्य पालन को सर्वोच्च धर्म माना गया है।
भारतीय वैदिक परंपरा में भी मृत्यु, शोक एवं अंत्येष्टि संस्कारों का विशेष महत्व बताया गया है। विशेष रूप से में मृत्यु के उपरांत किए जाने वाले संस्कारों, शोक की स्थिति तथा परिवार को सांत्वना देने वाले मंत्रों का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है।
इसके अतिरिक्त में भी “यम” एवं “पितरों” से संबंधित सूक्तों के माध्यम से मृत्यु एवं परलोक से जुड़ी मान्यताओं का वर्णन मिलता है।
भारतीय समाज में प्रचलित परंपराओं के अनुसार किसी परिजन की मृत्यु के उपरांत तेरह (13) दिनों तक विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं, जिनमें परिवार की सक्रिय सहभागिता आवश्यक होती है।
किन्तु वर्तमान परिस्थितियों में पर्याप्त अवकाश के अभाव के कारण कर्मचारियों को विवश होकर इन सभी संस्कारों को मात्र 2-4 दिनों में ही संपन्न करना पड़ता है, जो न तो हमारी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप है और न ही धार्मिक दृष्टि से उचित है। इससे कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा एवं सामाजिक असंतोष का सामना करना पड़ता है।
ऐसी संवेदनशील परिस्थिति में कर्मचारी मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावित होता है। यदि उसे पर्याप्त अवकाश उपलब्ध नहीं होता, तो वह न तो अपने धार्मिक एवं पारिवारिक कर्तव्यों का समुचित निर्वहन कर पाता है और न ही कार्य करने की स्थिति में होता है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं वैदिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए सभी सैलरीड कर्मचारियों के लिए निम्नलिखित प्रावधान किया जाए:
शोक अवकाश किसी कर्मचारी के माता-पिता, पति/पत्नी, बच्चों अथवा अन्य निकट परिजनों के निधन की स्थिति में कम से कम 13 दिनों का सह वेतन शोक अवकाश प्रदान किया जाए, ताकि वह:अंतिम संस्कार (अंत्येष्टि) एवं धार्मिक विधियों को पूर्ण कर सके
श्राद्ध, तर्पण एवं अन्य वैदिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हो सके
परिवार के साथ रहकर मानसिक एवं भावनात्मक संतुलन प्राप्त कर सके
यह प्रावधान न केवल भारतीय सांस्कृतिक एवं वैदिक मूल्यों का सम्मान करेगा, बल्कि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक दायित्वों एवं मानवीय गरिमा की भी रक्षा करेगा।

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