नशे की बजाय गेहूं बिक्री पर प्रतिबंध लगाने में लगी है सरकार : राजीव राजा
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37 विधायक वाला दल मौन, इनेलो निभा रही है विपक्ष की भूमिका : दलबीर किरमारा
गेहूं खरीद में पारदर्शिता के नाम पर बहाना बना रही है सरकार : राजीव राजा
हरियाणा हिसार: राजेश सलूजा
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष राजीव राजा ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों का स्वागत करने के बजाय उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गेहूं की खरीद में देरी को पारदर्शिता का नाम देकर बहाना बना रही है, जबकि किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में भटकने को मजबूर हैं।
राजीव राजा सोमवार को प्रदेश सचिव दलबीर किरमारा के नेतृत्व में किसानों से मुलाकात करने के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर दलबीर किरमारा ने पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि इनेलो द्वारा किसान कष्ट निवारण कमेटी का गठन किया गया है, जो किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि फसल खरीद के लिए सरकार द्वारा लगाई गई कई शर्तें किसानों के हित में नहीं हैं और उन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में भले ही विपक्ष की संख्या कम हो, लेकिन इनेलो किसानों के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठा रही है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 37 विधायकों वाला दल मौन है, जबकि केवल दो विधायक होने के बावजूद इनेलो प्रभावी रूप से विपक्ष की भूमिका निभा रही है।
बायोमेट्रिक व्यवस्था से बढ़ेगी परेशानी
किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष राजीव राजा ने कहा कि ट्रैक्टर-ट्रॉली के पंजीकरण और बायोमेट्रिक प्रक्रिया के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि जैसे-जैसे मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ेगी, किसानों की लंबी कतारें सड़कों तक लग सकती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों को प्रोत्साहित करते हुए उनका स्वागत करना चाहिए था, क्योंकि किसान अन्नदाता के रूप में पूरे देश का पेट भरने का कार्य करता है। इसके विपरीत सरकार ऐसी शर्तें लागू कर रही है, जिससे किसानों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
राजीव राजा ने कहा कि वर्षों से किसान बिना किसी परेशानी के अपनी फसल बेचता आया है, लेकिन वर्तमान में नई शर्तों और प्रक्रियाओं के कारण किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खरीद के लिए बायोमेट्रिक और तीन गवाह की शर्त किसानों के लिए अत्यंत कठिन और शर्मनाक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नशे की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने की बजाय सरकार गेहूं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसा वातावरण बना रही है, जिससे किसान परेशान हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश का अधिकांश वर्ग किसान है, जो पूरे समर्पण के साथ देश की सेवा कर रहा है, इसलिए सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
ये रहे उपस्थित
दलबीर किरमारा (प्रदेश सचिव), राजीव राजा (जिला अध्यक्ष, किसान सैल), विजय सेलवाल (हलका अध्यक्ष), हरिकेश दनोदा, रणबीर नैन प्रभुवाला, सतबीर बोबुवा, रामफल सरहेड़ा, भूप मुंड (अग्रोहा), निहाल सिंह (शिवानी), अतर सिंह (नंबरदार), सुरेश बिठमड़ा (जिला सचिव, हिसार), कृष्ण भेरी (अकबरपुर), राजवीर (जाजनवाला) सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने किसानों की समस्याओं को मौके पर जाकर सुना।

