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April 16, 2026

Right Media Samachar

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भारतीय संस्कृतिऔर समग्र मानवता कोबचाने में जैनो की महत्वपूर्ण भूमिका रहीहै। : बाबुभाई भवानजी

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भाजपा के वरिष्ठ नेता एवम एक्स डेप्युटी मेयर मुंबई बाबुभाई भवानजी का जय हिंद, जय जिनेन्द्र, भारत माता कि जय,, इतिहास साक्षी है जैनों ने अपनी भारत वसुंधरा, अपनी मातृभूमि,अपनी संस्कृति जननी को बचाने के लिये सदैव रणभूमि में खड़े हुये हैं स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाले अपने जैन पूर्वजों का इतिहास बताते भवानजी ने कहा की जानिए क्रांति का इतिहास ???
क्या आप को पता है हमारे लिए l पूर्वज सत्य का पर्याय थे जो जैनी ने गवाही दे दी वही सत्य ….
भारतीय राजनैतिक इतिहास 1858 की अविस्मरणीय घटना है की जिसमे दो अमर जैन शहीद हुए ” श्री वीर शहीद लाला हुक़ूमचन्द जैन’ और श्री वीर शहीद अमर चंद बांठिया।
“श्रीवीर शहीद लाला हुकुमचंद जी जैन’ 19जनवरी 1858 को “श्री लाला हुकुमचंद जी’ को उनके मकान के सामने कृतम तरीके से फांसी दे दी गई।श्री वीर शहीद अमरचंद जी बांठिया’ जब 1857का समर जोरो पर था तब ग्वालियर राज्य के कोषाध्यक्ष “श्री अमर चंद बांठिया जी ने 1857 के समर में झूझ रहे क्रांतिकारियो को सहायता दी 22 जून 1858 को को ग्वालियर में झूठे राजद्रोह के अपराध में आप को फांसी दे दी गई।
“श्री वीर शहीद मोतीचंद जी शाह’ जब अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे नारे लग रहे थे उंस समय जो व्यक्ति सार्वजनिक मंचो से “औपनिवेशिक स्वराज्य’ की मांग रखते थे जिन्होंने जेल में ” उपवास’ किये थे उनको षड्यंत्र कारी बता फांसी पर लटका दिया गया।
श्री वीर शहीद सिंघई प्रेमचंद जी जैन’ दिसम्बर 1933 में पूज्य महात्मा गांधी जी का दमोह में आगमन हुआ उन्होने गांधी जी का भाषण सुन देश भक्ति ऐसी जगी की आप “खादी’ के प्रचार में लग गये आप को जेल में जहर देकर छोड़ दिया मरने के लिये।
श्रीशहीद वीर सताप्पा टोपणणावर’ 16वर्ष की उम्र में आपने असहयोग आंदोलन शुरू किया,कई बार जेल गए सिंह गर्जना के साथ अंग्रेजों को जबाब दिया औरउनको गोली मार दी गई और वे शहीद हो गए।
श्रीअमर शहीद वीर उदय चंद जैन’ उनका मानना था “भगतसिंह और चंदशेखर जी कभी पुलिस से नही डरे डरना कायरता है’ आप की सभा पर लाठीचार्ज हुआ वे शहीद हुए।
श्री वीर शहीद साबूलाल जैन जी बैसाखिया’ गढ़ाकोटा जिला सागर जिसमे बुंदेलखंड के हृदय स्थल आजादी की लड़ाई से अछूता नही रहा वो अपने 5 साथियो साथ तिरंगा झंडा लिए आगे बढे वो सभी ने यूनियन जेक निकालकर तिरंगा लगाने की कोशिश की सामने से धांय धांय गोलियां चली सभी शहीद हो गए।
श्रीअमर शहीद कुमारी ज्यावती संघवी’ वे बाल उम्र में ही जुलूस का नेतृत्व कर रही थी पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े जिसमे आप शहीद हो गई।
श्री अमर शहीद अण्णा पन्नावले’ वे 1942 के आंदोलन में लड़े और मात्र 17वर्ष की उम्र में शहीद हो गए।
श्री अमर शहीद मगनलाल ओसवाल जी’ 6सितंबर 1942 को इंदौर में एक जुलूस निकाला वे सबसे आगे “भारत माता की जय’,”अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे लगा रहे थे ’ पुलिस ने लाठीचार्ज और गोलियां वर्षा की ओर वे शहीद हुए।
श्री वीर अमर शहीद भूपाल अणसकुरे’ “असल आजादी के नींव के पत्थर थे उनको को पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण मारे जाने से वो शहीद हो गये।
श्री अमर शहीद कंधीलाल जैन’ 12मार्च 1930 को अपना इतिहासिक दांडी मार्च प्रारंभ किया इस मार्च में गांधी जी द्वारा चुने 89अनुयायी थे सरकार ने नमक पर कर लगाकर दुगना कर दिया था मार्शल ला लागू हुआ खुलेआम मारा गया वो एक जुलूस में शहीद हो गये।
“श्रीअमर शहीद मुलायम चंद जैन’ उनके यहां कांग्रेसी मित्रों का जमावड़ा लगता था गर्मागर्म राजनीतिक बाते होती थी उनको को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया 9दिन लगातार पीटा गया उनकी की सांस ने उनके शरीर से अंतिम विदाई ली।
श्रीअमर शहीद चौधरी भैयालाल जी’ जिला दमोह वो धनी और सम्पन्न व्यक्ति थे उन्होने “श्रीमान लोकमान्य बाल गंगाधर राव तिलक जी’ को दमोह में सभा आयोजन में आमंत्रित किया दमोह से 20 किलोमीटर दूर सभा का आयोजन “अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर’ जी मे हुआ वो जबरदस्त वक्ता थे उन्होने कलकत्ता से मीटिंग कर ट्रेन से लौट रहे थे अंग्रेज सैनिकों से विवाद हुआ अंग्रेज सैनिक ने उन पर गोली चला दी और वे शहीद हो गये।

श्री अमर शहीद चौथमल भंडारी जी’ आपने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल में अपना पुरा जीवन बिता दीया 1943 में देहावसान हो गया आप शहीद हुये* “श्रीमान अमर शहीद भूपाल पंडित’ वो असामान्य गुणों से सम्पन्न थे बहुत जबरदस्त दंगलों में उनकी भूमिका रही वे कई बार जेल गए और जेल में देहावसान हो गया आप शहीद हो गए।

श्री अमर शहीद भारमल ने बहुत सारे आंदोलन का नेतृत्व किया 16 सितम्बर1942को पुलिस की गोली से उनका देहावसान हो गया और वे शहीद हो गए

” श्री अमर शहीद हरिश्चन्द्र दगडोबा जैन’ हैदराबाद को निज़ाम राज से मुक्ति दिलाने के लिये भी देशवासियों ने अपनी जान गवां दी इसी संग्राम में हरिश्चन्द्र जी दगडोबा जी शहीद हुये उनके के भाई को भी छल से मारा गया।
स्वतंत्रता संग्राम में जैनो की महत्वपूर्ण भूमिका रही है जैन धर्मावलम्बियों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया तन,मन,धन से सहयोग दिया जैन धर्मावलंबियों के बलिदान को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नही किया जा सकता इसी कारण भारत सरकार में मंत्री भी होते थे और 50 से 60 सांसद भी !!
भारत,भारतीय संस्कृतिऔर समग्र मानवता को बचाने में जैनो की ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जैनियों को रहस्यमय ढंग से नजरअंदाज करने का सीधा अर्थ यही है भारतीय संस्कृति को सर्वस्व रुप से मिटा देना है जो देश के भविष्य के लिए ख़तरनाक साबित होगा, यह बात स्वतन्त्र वीर सेनानी,(वानर सेना) श्री रवजी बापा के पुत्र भवानजी ने की,।।।।

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