टी एम एम से आरपीएफ के जवानों का भविष्य अधर में
वी बी माणिक
मुंबई बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है कि रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक से लेकर नीचे कार्यरत सिपाहियो का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय बना दिया है डीजी सोनाली मिश्रा ने पहले तो इन सभी ट्रांसफर फरवरी मार्च तक हो जाता था पर अब यह ट्रांसफर अप्रैल से मई तक होने के कारण जवानों के बच्चों का भी भविष्य बेकार हो गया है इस कारण विभाग में डीजी सोनाली मिश्रा के विरुद्ध आंतरिक रूप से काफी नाराजगी फैल रही है कोई जवान सामने से बोलने की ताकत नहीं रखता है एक पुरानी कहावत है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा अभी तक सभी के ट्रांसफर रुके पड़े है अब तो टी एम एम जब ट्रांसफर निकालेगा तब जाकर आदेश निकलेगा यह है ईमानदारी का खेल जो कि टी एम एम की जानकारी केवल सोनाली मिश्रा को ही है और पाँच प्रतिशत अधिकारियों को है इस कारण से अधिकांश आरपीएफ निरीक्षक और जवान परेशान है कि किसका ट्रांसफर कहा होगा किस जगह पर होगा वहां पर बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छे स्कूल है या नहीं है उनके रहने की व्यवस्था कैसी है इसकी व्यवस्था प्रशासन की ओर से ठीक है या नहीं इसके अलावा बहुत सारी बाते है आजकल आरपीएफ में कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का भी अभाव है इसके लिए तो केंद्र सरकार जवाबदार है जो सुरक्षा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करवाती है इसके साथ ये भी है कि रेल सुरक्षा बल में संख्या बल की भारी कमी है स्टाफ ठीक से काम करता नहीं है टी एम एम से कर्मियों में काफी असंतोष है टी एम एम की कंप्यूटर फीडिंग करता कौन है और कौन से नियम के तहत होता है इसमें क्या देखा जाता है इसका आधार क्या है जितने डीजी आते है उतने नियम बनाते है क्या आरपीएफ में नियम कम और मोनोपली ज्यादा चलती है आरपीएफ में पहले आईपीएस अधिकारियों की संख्या ज्यादा होती थी अब केवल एक हो गई है

