नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9833326393 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें

Recent news

1 min read

भ्रष्टाचारी,कामचोर और देश विरोधी लोग ही कर रहे हैं मोदी सरकार का विरोध: भवानजी* (*( देश वोही कायदा वोही इसको चलाने वाला बदला)*) *मुंबई: मुंबई के पूर्व उप महापौर और शिवसेना नेता बाबूभाई भवानजी ने कहा है कि पीएम मोदी जी ने देश भ्रष्टाचारियों और कामचोर लोगों पर अंकुश लगाने का काम किया है इसलिए ये लोग मोदी जी से नाराज हैं और किसी भी हद तक जाकर उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।* *आज एक बयान में भवानजी ने कहा कि नए आधार लिंकिंग के कारण महाराष्ट्र में एक साल में 10 लाख गरीब गायब हो गए!* *देश में लाखों फर्जी बीपीएल कार्ड धारक गायब हो गए हैं!* *उन्होंने कहा कि एक करोड़ से अधिक फर्जी एलपीजी कनेक्शन धारकों के कनेक्शन समाप्त कर दिए गए हैं!मदरसा से छात्रवृत्ति पाने वाले 1 लाख 95 हजार फर्जी बच्चे गायब हो गए! एक करोड़ 50 लाख फर्जी राशन कार्ड धारक गायब हो गए! ये सभी लोग कहाँ और क्यों गायब हो गए?* *भवानजी ने कहा कि चोरों की पूरी काली थैली खुलने वाली है, इसलिए सभी चोरों ने मिलकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि आधार लिंक करना हमारे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है! चोरों के लिए निजता का कौन-सा अधिकार?* *उन्होंने कहा कि मोदीजी के कारण 3 लाख से अधिक फर्जी और बोगस कंपनियाँ बंद कर दी गईं!* *राशन व्यापारी नाराज़ हैं!* *प्रॉपर्टी डीलर नाराज़ हैं!* *ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के कारण दलाल नाराज़ हो गए हैं!* *उन्होंने कहा कि 40,000 फर्जी गैर-सरकारी संस्थाएँ (NGO) बंद कर दी गई हैं, इसलिए इन संस्थाओं के मालिक भी नाराज़ हैं!* *जिन्होंने दो नंबर के पैसों से प्रॉपर्टी खरीदी, वे नाराज़ हैं!* *उन्होंने कहा कि कुछ ठेकेदार ई-टेंडरिंग के कारण भी नाराज़ हैं!* *गैस कंपनियाँ नाराज़ हैं!* *अब तक 12 करोड़ लोग आयकर के दायरे में आ चुके हैं, इसलिए वे लोग नाराज़ हैं!* *जीएसटी प्रणाली लागू होने के कारण व्यापारी नाराज़ हैं, क्योंकि वे स्वचालित प्रणाली के दायरे में आ गए हैं!* *दो नंबर में काम करने वाले लोगों की कमाई रुक गई है!* *काले धन को सफेद करने की व्यवस्था कुछ हद तक कमजोर हो गई है!* *उन्होंने कहा कि आलसी सरकारी अधिकारी नाराज़ हैं, क्योंकि उन्हें समय पर नौकरी पर जाना पड़ता है!* *वे लोग नाराज़ हैं, जो समय पर काम नहीं करते और रिश्वत देकर काम करवाने में विश्वास रखते हैं!* *उन्होंने कहा कि जेएनयू (JNU) का वह छात्र, जो 7 वर्षों तक मुफ्त की रोटी खाता है, 10 रुपये महीने में कमरे में रहता है और 300 रुपये महीने में खाना खाता है, वह भी मोदीजी से नाराज़ है!* *उन्होंने कहा कि परिवर्तन की कहानी लिखी जा रही है। जो इसे समझ रहा है, वह बदल रहा है; और जो नहीं समझ रहे, वे मानसिक गुलाम हमें अंधभक्त कहकर अपना सीना पीट रहे हैं!*

September 22, 2026

Right Media Samachar

Hindi News, हिन्दी समाचार, हिंदी न्यूज़, Latest Hindi News, Breaking News, Right Media Samachar

टी एम एम से आरपीएफ के जवानों का भविष्य अधर में 



 

वी बी माणिक

 

मुंबई बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है कि रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक से लेकर नीचे कार्यरत सिपाहियो का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय बना दिया है डीजी सोनाली मिश्रा ने पहले तो इन सभी ट्रांसफर फरवरी मार्च तक हो जाता था पर अब यह ट्रांसफर अप्रैल से मई तक होने के कारण जवानों के बच्चों का भी भविष्य बेकार हो गया है इस कारण विभाग में डीजी सोनाली मिश्रा के विरुद्ध आंतरिक रूप से काफी नाराजगी फैल रही है कोई जवान सामने से बोलने की ताकत नहीं रखता है एक पुरानी कहावत है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा अभी तक सभी के ट्रांसफर रुके पड़े है अब तो टी एम एम जब ट्रांसफर निकालेगा तब जाकर आदेश निकलेगा यह है ईमानदारी का खेल जो कि टी एम एम की जानकारी केवल सोनाली मिश्रा को ही है और पाँच प्रतिशत अधिकारियों को है इस कारण से अधिकांश आरपीएफ निरीक्षक और जवान परेशान है कि किसका ट्रांसफर कहा होगा किस जगह पर होगा वहां पर बच्चों को पढ़ने के लिए अच्छे स्कूल है या नहीं है उनके रहने की व्यवस्था कैसी है इसकी व्यवस्था प्रशासन की ओर से ठीक है या नहीं इसके अलावा बहुत सारी बाते है आजकल आरपीएफ में कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का भी अभाव है इसके लिए तो केंद्र सरकार जवाबदार है जो सुरक्षा कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करवाती है इसके साथ ये भी है कि रेल सुरक्षा बल में संख्या बल की भारी कमी है स्टाफ ठीक से काम करता नहीं है टी एम एम से कर्मियों में काफी असंतोष है टी एम एम की कंप्यूटर फीडिंग करता कौन है और कौन से नियम के तहत होता है इसमें क्या देखा जाता है इसका आधार क्या है जितने डीजी आते है उतने नियम बनाते है क्या आरपीएफ में नियम कम और मोनोपली ज्यादा चलती है आरपीएफ में पहले आईपीएस अधिकारियों की संख्या ज्यादा होती थी अब केवल एक हो गई है

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Right Menu Icon