बृहन्मुंबई महानगरपालिका
1 min readबृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा शहर क्षेत्र की भूमिगत मेहराबदार वर्षा जल नालियों का जियोपॉलिमर लाइनिंग (Trenchless Technology) के माध्यम से सुदृढ़ीकरण
ब्रिटिशकालीन मेहराबदार वर्षा जल नालियों का आयु कम से कम 50 वर्ष बढ़ेगा
अतिवृष्टि के दौरान वर्षा जल निकासी की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी
बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा मुंबई शहर क्षेत्र में लगभग 100 वर्ष पुरानी भूमिगत मेहराबदार वर्षा जल नालियों का जियोपॉलिमर लाइनिंग (Trenchless Technology) के माध्यम से सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इससे इन ब्रिटिशकालीन नालियों की आयु कम से कम 50 वर्ष तक बढ़ जाएगी। साथ ही, पानी के प्रवाह की गति बढ़ेगी और अतिवृष्टि के दौरान वर्षा जल का निकास तेजी से हो सकेगा।
इस कार्य का निरीक्षण उप आयुक्त (इन्फ्रास्ट्रक्चर) श्री गिरीश निकम, मुख्य अभियंता (वर्षा जल नालियां) श्रीमती कल्पना राऊळ, उप मुख्य अभियंता सुनीलदत्त रसाळ, कार्यकारी अभियंता श्री मिलिंद व्हटकर, श्री प्रशांत रणसुरे, श्री मधुसूदन सोनवणे आदि अधिकारियों ने श्यामलदास गांधी मार्ग (प्रिंसेस स्ट्रीट) फ्लाईओवर के पास स्थित शांतिनिकेतन वर्षा जल आउटफॉल के निकट किया।
मुंबई के पश्चिम में अरब सागर स्थित है और शहर में खाड़ी क्षेत्र भी है। मेहराबदार/बंद वर्षा जल निकासी प्रणाली के माध्यम से पानी को समुद्र में छोड़ने के लिए ज्वार-भाटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शहर क्षेत्र में 495 किलोमीटर लंबी वर्षा जल नालियां हैं। इसके अलावा पूर्व और पश्चिम उपनगरों में 63-63 किलोमीटर, कुल मिलाकर 621 किलोमीटर लंबी मेहराबदार/बंद नालियां मौजूद हैं।
इनमें से शहर क्षेत्र की जिन नालियों में मरम्मत आवश्यक है, वहां सुधार कार्य जारी है। वर्तमान में 14 किलोमीटर लंबाई की नालियों का लाइनिंग कार्य किया जा रहा है। इन भूमिगत नालियों की नियमित सफाई और गाद निकासी भी की जाती है। सीसीटीवी सर्वेक्षण में पाया गया कि कई पुरानी नालियों में दरारें, ईंटों का खिसकना, जोड़ खराब होना और छत का हिस्सा गिरना जैसी समस्याएं हैं। कुल 23,548 मीटर लंबाई की 56 नालियां खराब स्थिति में पाई गईं, जिनमें से 14,285 मीटर लंबाई की 27 नालियों का (पहले चरण में) तत्काल पुनर्वसन आवश्यक है।
महानगरपालिका ने इस विषय पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT मुंबई) और वीरमाता जिजाबाई प्रौद्योगिकी संस्थान (VJTI) से परामर्श किया। दोनों संस्थानों के सुझावों के आधार पर नवंबर 2022 में तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। समिति की अनुशंसा के अनुसार, जियोपॉलिमर लाइनिंग ट्रेंचलेस तकनीक द्वारा मरम्मत कार्य किया जा रहा है।
वर्षा जल विभाग द्वारा पहले चरण में शहर क्षेत्र की नालियों में इस तकनीक का उपयोग शुरू किया गया है। यह तकनीक भारत में पहली बार उपयोग की जा रही है, जबकि अमेरिका जैसे देशों में इस प्रकार के कार्य पहले से किए जाते रहे हैं।
वर्षा जल नालियों की क्षमता बढ़ेगी
हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मुंबई में कुछ ही दिनों में लगभग 1000 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। इस पृष्ठभूमि में नालियों की क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यावरण अनुकूल तकनीक
लगभग 100 वर्ष पुरानी 27 भूमिगत मेहराबदार नालियों (14,285 मीटर) का पुनर्वसन किया जा रहा है। इससे इनकी आयु 50 वर्ष बढ़ेगी और जल प्रवाह की गति में सुधार होगा। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है, ऐसी जानकारी मुख्य अभियंता श्रीमती कल्पना राऊळ और उप मुख्य अभियंता श्री सुनीलदत्त रसाळ ने दी।


