पांचू राम का मीना बाजार बंद होगा ?
मुंबई मध्य रेल में कल्याण रेलवे स्टेशन पर आजकल अवैध हॉकरो की भरमार है जिस पर रेल सुरक्षा बल का कोई नियंत्रण नहीं है इसकी शिकायत मौखिक रूप से निरीक्षक पांचू राम मीणा बडबोले को फोन द्वारा किया गया है फिर भी ये अवैध हॉकर बड़े धड़ल्ले से धंधा कर रहे हैं इसके अलावा सहायक सुरक्षा आयुक्त कल्याण सिंह को भी किया गया जिस पर सिंह ने अतिशीघ्र कार्रवाई करने का आश्वासन दिया पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई इसके साथ ही अब आरपीएफ निरीक्षक और अधिकारी ये कहते हैं कि ये हमारा एरिया नहीं है तो अधिकारी ये बताए कि ये एरिया किसका है केडी एमसी या रेलवे का इस पर फोन द्वारा आई ओ डब्ल्यू ने कहा कि ये जानकारी आरपीएफ कल्याण के पास है इसके पूर्व भी खबर लगाई गई है फिर भी कल्याण का निरीक्षक बडबोले निरंकुश है इसको किसी भी वरिष्ठ अधिकारी का डर नहीं है क्योंकि यह अपने को आईजी मध्य रेल का दाहिना हाथ बताता है इसका कोई माई बाप नहीं है ऐसा प्रतीत होता है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डीजी श्रीमती सोनाली मिश्रा का भी करीबी बताया जाता है इसके ऊपर कोई भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करने के लिए डरते है ये भी चर्चा है कि साल का दो सीआर भी सोनाली मिश्रा से बोलकर सुरक्षा कर्मियों का बंद करवा दिया है मिश्रा करीब एक वर्ष के लिए आरपीएफ की डीजी के पद पर आई है ३१ अक्टूबर २६ को रिटायर्ड हो जाएंगी अब प्रश्न ये है कि पांचू राम मीणा बडबोले ने कौन सा ऐसा कार्य किया है जो सराहनीय है ये कुर्ला में थे तो प्लेटफार्म के आसपास हॉकर चलाते थे यहां भी कोई सराहनीय कार्य नहीं किया है इसके बाद भुसावल में भी कोई अच्छा कार्य नहीं किया है अगर मीणा ने कोई सराहनीय कार्य किया है तो डीजी मिश्रा और आईजी मध्य रेल इसकी जानकारी दे सकते है ? माध्यरेल में और भी साहसी और कर्तव्यनिष्ठ निरीक्षक हैं उनको कल्याण में पोस्टिंग क्यों नहीं किया गया यह बड़ा प्रश्न है किसके दबाव में पांचू राम की पोस्टिंग की गई जो कि भुसावल में इनका कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ था कल्याण स्टेशन काफी सेंसेटिव है इस स्टेशन पर अवैध हॉकर गार्डुल्ले टिकट दलाल की भरमार है वहीं डीएससी श्रीमती प्रतीक्षा सिंह का भी कोई नियंत्रण नहीं है आंतरिक रूप से रेल सुरक्षा कर्मियों में भी रोष व्याप्त है पर कोई बोलने को तैयार नहीं है सब एक ही नारा लगा रहे है मैडम कब जाएंगी वहीं सीनियर डीएससी ऋषि कुमार शुक्ल के बारे में अधिकांश आरपीएफ निरीक्षक और कर्मचारी ये कहते है कि साहब का ट्रांसफर नहीं होना चाहिए क्योंकि इनकी वजह से सुरक्षा कर्मी सुरक्षित हैं और सभी का ध्यान रखते है पर शुक्ला। जी की टीम बराबर नहीं है ये सब काम ठीक से करते तो शुक्ला जी का गौरव और बढ़ता इनकी टीम ही इनका नाम खराब कर रही है अब देखना ये है कि इस विषय पर आरपीएफ अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं और अपनी ईमानदारी का परिचय देते है अप्रैल का दूसरा सप्ताह शुरू हो गया है पर अभी तक निरीक्षको के ट्रांसफर नहीं हुए ये कौन सा टी एम एम है जो ईमानदारी से काम कर रहा है और ट्रांसफर में विलंब हो रहा है कही ऐसा तो नहीं कि मैडम के रिटायरमेंट के बाद सभी के ट्रांसफर हो
अजब तेरा जलवा गजब तेरा खेल
रेल सुरक्षा बल हो गई पूरी तरह फेल



