पंढरपुर में ऐतिहासिक बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न
नई दिल्ली 5 अप्रैल / पवित्र नगरी पंढरपुर में आयोजित “चलो बुद्ध के घर” भव्य बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह ने सामाजिक परिवर्तन का एक ऐतिहासिक अध्याय रच दिया। संत दामाजी पंत सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के हजारों लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर बौद्ध धम्म को अपनाया।
इस अवसर पर मराठा, चांभार, होलार, मातंग, भंगी, मांग, गारुड़ी तथा ओबीसी समाज के नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेते हुए समता, बंधुता और मानवता के मार्ग को स्वीकार किया। विशेष रूप से मातंग समाज की वृद्ध महिला जनाबाई साठे द्वारा धम्म दीक्षा लेना समारोह का अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक क्षण रहा।
भदंत डॉ. सुमेध (चैत्यभूमि, मुंबई) के मार्गदर्शन में भिक्खू संघ ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण और पंचशील का उच्चारण कराते हुए विधिवत धम्म दीक्षा प्रदान की। पूरे सभागार में “बुद्धं शरणं गच्छामि” का उद्घोष गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह धम्ममय हो गया।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में लातूर लोकसभा के पूर्व सांसद, संसदरत्न डॉ. सुनील बळीराम गायकवाड उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा—
“भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का सपना पूरे भारत को बुद्धमय बनाना था। आज का यह ऐतिहासिक समारोह उस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।”
उन्होंने आगे कहा—
“अठारह पगड़ी समाजों के लोगों का एक साथ बौद्ध धम्म स्वीकार करना सामाजिक एकता और परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है।”
इस भव्य समारोह की अध्यक्षता प्रबुद्ध साठे ने की। मंच पर विभिन्न समाजों से धम्म दीक्षा लेने वाले अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। साथ ही समता सैनिक दल, छत्रपति संभाजीनगर की पूरी टीम ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सामाजिक परिवर्तन की नई दिशा
पंढरपुर में आयोजित यह धम्म दीक्षा समारोह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समता, स्वाभिमान और जागरूकता का प्रतीक बनकर उभरा है। विभिन्न समुदायों के लोगों ने एकजुट होकर भगवान बुद्ध के करुणा, प्रज्ञा और समानता के संदेश को अपनाते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा दी है।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने पंढरपुर को एक बार फिर सामाजिक जागृति के केंद्र के रूप में स्थापित किया है।

