नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9833326393 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें

Recent news

June 15, 2026

Right Media Samachar

Hindi News, हिन्दी समाचार, हिंदी न्यूज़, Latest Hindi News, Breaking News, Right Media Samachar

24 घंटे से ज्यादा हिरासत = अफसर की जेब से ₹25,000: इलाहाबाद HC

1 min read



ओ पी तिवारी
प्रयागराज, 9 जून 2026।* इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत को लेकर पुलिस को कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा बिना मजिस्ट्रेट पेशी हिरासत में रखना संविधान का सीधा उल्लंघन है। अब इसका खामियाजा दोषी पुलिस अफसर को अपनी सैलरी से भरना पड़ेगा।
जस्टिस JJ मुनीर और जस्टिस संजय कुमार की डिवीजन बेंच ने 8 जून को Matamber Mishra vs State of UP मामले में ये ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
कोर्ट के आदेश के हिसाब से पूरी खबर:
1. मामला क्या था
प्रयागराज के मतांबर मिश्रा को 26 नवंबर 2022 को SI सूर्या प्रकाश दुबे ने हिरासत में लिया। बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए 27 नवंबर 2022 तक पुलिस लॉकअप में रखा। यानी 24 घंटे से ज्यादा अवैध हिरासत। मिश्रा ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में सिर्फ SI के खिलाफ जांच की मांग थी, मुआवजा नहीं मांगा था।
*2. कोर्ट का पहला आदेश – अवैध हिरासत मानी*
बेंच ने कहा कि संविधान के Article 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर, सफर का समय छोड़कर, मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य है। 24 घंटे से ज्यादा हिरासत बिना न्यायिक रिमांड के पूरी तरह गैरकानूनी है। कोर्ट ने माना कि मिश्रा को “colour of authority” में SI ने गैरकानूनी तरीके से स्वतंत्रता से वंचित किया।
*3. दूसरा आदेश – ₹25,000 मुआवजा + ₹10,000 खर्च*
कोर्ट ने UP सरकार को आदेश दिया कि वो पीड़ित मतांबर मिश्रा को 30 दिन के अंदर ₹25,000 मुआवजा और ₹10,000 मुकदमे का खर्च दे। कोर्ट ने UP सरकार की 23 मार्च 2021 की नीति का हवाला दिया। उस नीति में लिखा है कि अवैध हिरासत साबित होने पर पीड़ित को ₹25,000 मुआवजा मिलेगा।
*4. तीसरा आदेश – दोषी अफसर की सैलरी से वसूली*
ये आदेश सबसे अहम है। कोर्ट ने राज्य सरकार को छूट दी कि मुआवजा देने के बाद वो पूरी रकम दोषी SI सूर्या प्रकाश दुबे की सैलरी/पारिश्रमिक से वसूल ले। बेंच ने अपने आदेश में लिखा – “The State ought be granted liberty upon payment of the compensation and costs awarded to the petitioner to recover it from Dubey in whatever manner they deem appropriate including deducting it from his remuneration”
*5. चौथा आदेश – ‘शांति भंग’ की आड़ पर रोक*
कोर्ट ने CrPC की धारा 107/116 यानी ‘शांति भंग’ की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की। कहा कि पुलिस इसका इस्तेमाल घरेलू झगड़े दबाने या लोगों को डराने के लिए नहीं कर सकती। अगर बिना संज्ञेय अपराध के सिर्फ घरेलू विवाद में हिरासत की गई तो वो गैरकानूनी होगी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को घरेलू स्क्वैबल में दखल देने का अधिकार नहीं है जब तक कोई संज्ञेय अपराध न हुआ हो
*6. कोर्ट की कड़ी टिप्पणी – “1000 में 1 केस आता है”*
बेंच ने पुलिस की मानसिकता पर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अफसर मानते हैं कि “out of one thousand violations, only one citizen would step forward to enforce rights and seek accountability”। इसलिए कई उल्लंघन दब जाते हैं। लेकिन जब नागरिक कोर्ट आता है तो कोर्ट का फर्ज है संविधान से मिले अधिकार लागू कराना।

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Right Menu Icon