सायन में आरएसएस का दशहरा पर्व एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम संपन्न

मुंबई: हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय सेवक संघ ने दशहरा पर्व के साथ शस्त्र पूजन उत्सव का आयोजन किया। यह कार्यक्रम जी.एस.बी. हॉल, सायन, मुंबई में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर माटुंगा से शिव किले तक पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता, श्री समीरजी कोपिकर (मुंबई महानगर के सह संपर्क प्रमुख), ने दशहरा पर्व के महत्त्व पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने इस पर्व को राष्ट्र सेवा एवं अनुशासन का प्रतीक बताते हुए सभी को संगठित होकर देश की सेवा करने का आह्वान किया।
विशेष अतिथि, योगाचार्य, समाज सुधारक एवं क्रांतिकारी विचारक परम पूज्य स्वामी भारत भूषण जी ने अपने संबोधन में कहा, “हम भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उपमहापौर बाबुभाई भवानजी के साथ काम कर रहे हैं, और कच्छ से कन्याकुमारी तक ‘हर देवालय हो विद्यालय’ और ‘हर गौशाला हो पाठशाला’ अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत संस्कार, देशभक्ति, आत्मरक्षा, योगा,पर्यावरण एवं कौशल विकास की शिक्षा प्रदान की जा रही है।”

उन्होंने “हर हाथ बांसुरी, हर सांस बांसुरी” कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध और भगवान बिरसा मुंडा जैसी विभूतियों की याद दिलाते हुए सभी राष्ट्रप्रेमियों से भेदभाव मिटाकर एकजुट होकर राष्ट्र सेवा में जुटने का आह्वान किया। स्वामी जी की बांसुरी वादन की प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु श्री वीरत्न महाथेरो भंते जी (अध्यक्ष, भिक्षु संघ, मुंबई) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबुभाई भवानजी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि बाबुभाई जी उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया था, परंतु अपनी धर्मपत्नी की अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण उन्हें तुरंत जाना पड़ा जाते जाते उन्होंने कहा कि देश के उज्वल भविष्य के लिए आदरणीय सर संघ चालक श्री मोहन भागवत जी के मार्गदर्शन और माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में देश विकास की दिशा में अग्रसर है। और वे आदिवासी, वनवासी, पिछड़े एवम दलितो के ऊपर विषेश ध्यान दे रहे हैं, श्री वीरत्न भंते ने सर संघचालक के 2023 मे दिए गए वक्तव्य को स्मरण करते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम सभी को पुराने मतभेद भुलाकर एक साथ आना होगा, तभी राष्ट्र की उन्नति संभव है।”
उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न समाजों के कार्यक्रमों में शामिल होने पर कई बार उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद वे बाबुभाई भवानजी और स्वामि जी के साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए हर चुनौती को पार करने के लिए तैयार हैं।

