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भ्रष्टाचारी,कामचोर और देश विरोधी लोग ही कर रहे हैं मोदी सरकार का विरोध: भवानजी* (*( देश वोही कायदा वोही इसको चलाने वाला बदला)*) *मुंबई: मुंबई के पूर्व उप महापौर और शिवसेना नेता बाबूभाई भवानजी ने कहा है कि पीएम मोदी जी ने देश भ्रष्टाचारियों और कामचोर लोगों पर अंकुश लगाने का काम किया है इसलिए ये लोग मोदी जी से नाराज हैं और किसी भी हद तक जाकर उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।* *आज एक बयान में भवानजी ने कहा कि नए आधार लिंकिंग के कारण महाराष्ट्र में एक साल में 10 लाख गरीब गायब हो गए!* *देश में लाखों फर्जी बीपीएल कार्ड धारक गायब हो गए हैं!* *उन्होंने कहा कि एक करोड़ से अधिक फर्जी एलपीजी कनेक्शन धारकों के कनेक्शन समाप्त कर दिए गए हैं!मदरसा से छात्रवृत्ति पाने वाले 1 लाख 95 हजार फर्जी बच्चे गायब हो गए! एक करोड़ 50 लाख फर्जी राशन कार्ड धारक गायब हो गए! ये सभी लोग कहाँ और क्यों गायब हो गए?* *भवानजी ने कहा कि चोरों की पूरी काली थैली खुलने वाली है, इसलिए सभी चोरों ने मिलकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि आधार लिंक करना हमारे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है! चोरों के लिए निजता का कौन-सा अधिकार?* *उन्होंने कहा कि मोदीजी के कारण 3 लाख से अधिक फर्जी और बोगस कंपनियाँ बंद कर दी गईं!* *राशन व्यापारी नाराज़ हैं!* *प्रॉपर्टी डीलर नाराज़ हैं!* *ऑनलाइन प्रणाली लागू होने के कारण दलाल नाराज़ हो गए हैं!* *उन्होंने कहा कि 40,000 फर्जी गैर-सरकारी संस्थाएँ (NGO) बंद कर दी गई हैं, इसलिए इन संस्थाओं के मालिक भी नाराज़ हैं!* *जिन्होंने दो नंबर के पैसों से प्रॉपर्टी खरीदी, वे नाराज़ हैं!* *उन्होंने कहा कि कुछ ठेकेदार ई-टेंडरिंग के कारण भी नाराज़ हैं!* *गैस कंपनियाँ नाराज़ हैं!* *अब तक 12 करोड़ लोग आयकर के दायरे में आ चुके हैं, इसलिए वे लोग नाराज़ हैं!* *जीएसटी प्रणाली लागू होने के कारण व्यापारी नाराज़ हैं, क्योंकि वे स्वचालित प्रणाली के दायरे में आ गए हैं!* *दो नंबर में काम करने वाले लोगों की कमाई रुक गई है!* *काले धन को सफेद करने की व्यवस्था कुछ हद तक कमजोर हो गई है!* *उन्होंने कहा कि आलसी सरकारी अधिकारी नाराज़ हैं, क्योंकि उन्हें समय पर नौकरी पर जाना पड़ता है!* *वे लोग नाराज़ हैं, जो समय पर काम नहीं करते और रिश्वत देकर काम करवाने में विश्वास रखते हैं!* *उन्होंने कहा कि जेएनयू (JNU) का वह छात्र, जो 7 वर्षों तक मुफ्त की रोटी खाता है, 10 रुपये महीने में कमरे में रहता है और 300 रुपये महीने में खाना खाता है, वह भी मोदीजी से नाराज़ है!* *उन्होंने कहा कि परिवर्तन की कहानी लिखी जा रही है। जो इसे समझ रहा है, वह बदल रहा है; और जो नहीं समझ रहे, वे मानसिक गुलाम हमें अंधभक्त कहकर अपना सीना पीट रहे हैं!*

September 22, 2026

Right Media Samachar

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व्यंग्य : *सोशल मीडिया पर घूँघट की आड़ में नफरत फैलाने का षड्यंत्र* 



  क्या जमाना आ गया है, जहाँ कभी फोटो खिंचवाने के लिए फोटो स्टूडियो जाना पड़ता था तथा नामधारी फोटोग्राफर की फोटो खींचने की कला से प्रभावित होकर व्यक्ति किसी खास फोटो स्टूडियो का रुख करता था। फोटो स्टूडियो में चारों ओर फ्रेम में विशेष फोटो सजे रहते थे। समय बदल गया है, अब वैसी कलाकारी का सम्मान नहीं रहा। आजकल हर हाथ में कैमरे की जगह मोबाइल है, मोबाइल में कैमरा फिट है, वह जहाँ चाहे, वहां मोबाइल से स्टिल फोटोग्राफी सहित वीडियो भी बना सकता है। किसी भी घटना या दृश्य को फिल्माने के लिए लाइट कैमरा ऑन कहने की आवश्यकता ही नहीं पड़ता। मोबाइल है, न फोटो खींचने और वीडियो बनाने के लिए।

केवल वीडियो बनाने तक का विषय होता, तब भी बड़ी बात नहीं थी। अब बात अधिक आगे बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर अनेक ऐसे प्राणी सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें अपना चेहरा दिखाने में शायद लज्जा आती है, इसी लज्जा के चलते वे घूँघट की आड़ में नफरत फैलाने वाले प्रसंग सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, उस पोस्ट पर बिना घूंघट वाले प्राणी आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं, कुछ उस पोस्ट का समर्थन करते हैं और कुछ उसका विरोध करते हैं। समाज विघटन फ़ैलाने के मंसूबे को उड़ान मिलती है यानि पोस्टकर्ता का उद्देश्य पूरा हो जाता है।

सच्चाई यह है कि कभी ट्रेन में, कभी बस में, कभी सड़क पर, कभी पार्क में किसी की ऊटपटाँग हरकत किसी मोबाईल धारक की कृपा से इतनी वायरल हो जाती है, कि बिना किसी प्रयास के रातोरात संबंधित प्राणी सेलिब्रिटी बन जाता है। कभी बाबा का ढाबा बूढ़े बाबा के परांठों की बिक्री बढ़ा देता है, तो कभी मुंबई के रेलवे प्लेटफार्म पर फ़िल्मी गाने सुनाने वाली किसी रानू मंडल को मशहूर कर देता है। कभी कोई नीली आँखों वाली मोनालिसा कुंभ में रंग बिरंगी कंठी माला बेचते बेचते फेमस हो जाती है। कभी रेल की सामान्य बोगी में सीट पाने के लिए कोई वीरांगना शराफत छोड़ दी मैंने की तर्ज पर हाथों में चप्पल लेकर किसी को गरियाती है, किसी जाति का नाम लेकर स्वयं को ऊंचा दर्शाती है और बदले में पिटाई का रसास्वादन करके शांत हो जाती है। कभी बिना टिकट यात्रा करने का अपराध करने के उपरांत भी कोई हेंकड़ी दिखाती है, बदले में जग हंसाई कराती है। कभी कोई कानून को ठेंगा दिखाकर समाज में नफरती बोल बोलती है, तो कोई अपने हाथ में गैस के सिलेंडर की तस्वीर लेकर वायरल हो जाती है।

बहरहाल सभी का अपना अपना जूनून है। किसी को समाज में नफरत फ़ैलाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना है, किसी को पॉपुलर होंने के लिए। उसकी हरकतों से समाज पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इससे किसी को कोई सरोकार नहीं है। घूंघट की आड़ में ऐसे पोस्ट अधिक वायरल किये जाते हैं। समझ नहीं आता, कि रोजी रोटी के गणित में उलझे हुए लोगों को नफरत भरे वीडियो देखने और उसके आधार पर नफ़रत का समर्थन करने का समय कैसे मिल जाता है। अपुन को तो किसी से प्यार करने की फुर्सत नहीं है, फिर लोग नफरत के लिए समय कैसे निकाल लेते हैं ? *(विभूति फीचर्स)*

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