मनपा अस्पतालों में बेड शेयरिंग और स्वच्छता को लेकर केईएम अस्पताल पर सवाल; निरीक्षण की तारीख और कार्रवाई स्पष्ट नहीं
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वी. बी. माणिक
केईएम अस्पताल में मरीजों की भीड़, और बेड की कमी और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर मरीजों और परिजनों की बड़ी शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रशासन के अधिष्ठाता डॉ हरिश पाठक की लापरवाही और संबंधित सभी वरिष्ठ अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष मिलने तक इन्हें आरोप या दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मरीजों और परिजनों का दावा है कि कुछ वार्डों में क्षमता से अधिक मरीज होने के कारण एक बेड पर दो मरीजों को रखा जा रहा है जिसके कारण संक्रमण फैलने से कोई नहीं रोक सकता और स्थिति दयनीय बनती जा रही है। यह दावा सही है, तो इससे मरीजों की सुविधा और संक्रमण नियंत्रण प्रभावित हो सकते हैं अस्पताल प्रशासन ने इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा नहीं दे रहा है वार्डवार स्थिति भी सार्वजनिक करने से कतरा रहे है।
कुछ परिजनों ने अस्पताल के परिसर में कचरा, गंदगी का साम्राज्य बना रखा है इससे अधिष्ठाता डॉ हरिश पाठक की कमज़ोरी कहे या लापरवाही अस्पताल प्रशासन साफ सफाईऔर रखरखाव में असक्षम दिखाई देता है बायोमेडिकल कचरे के कथित अनुचित निपटान और परिसर में आवारा कुत्तों-बिल्लियों की मौजूदगी के दावे भी सामने आए हैं। इनकी पुष्टि के लिए स्वच्छता रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और संबंधित ठेकेदारों की अनुपालन रिपोर्ट जरूरी होगी। पर देंगे नहीं और निरीक्षण करने पर पाठक की सारी कलई खुल जाएगी और उपायुक्त शरद उघड़े की भी कमज़ोरी को दर्शाता है कि अस्पतालों पर इनकी पकड़ नहीं है अधिकांश डॉ मनमानी पर उतारू है मरीजो से अवैध वसूली भी करते है
अतिरिक्त नगर आयुक्त (स्वास्थ्य) प्राजक्ता वर्मा के औचक निरीक्षण का भी उल्लेख है, पर श्रीमती वर्मा करेंगी नहीं अगर निरीक्षण किया तो डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ जाएगी लेकिन उपलब्ध जानकारी में निरीक्षण की सटीक तारीख, दर्ज निष्कर्ष और उसके आधार पर की गई कार्रवाई स्पष्ट नहीं है। और रिपोर्ट मिलेगा नहीं
महानगर पालिका अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि निरीक्षण कब हुआ, किन वार्डों और विभागों की जांच की गई, किस अधिकारी ने किया क्या कमियां दर्ज हुईं और सुधार के लिए क्या समय सीमा तय की गई। यदि बेड शेयरिंग, स्वच्छता या बायोमेडिकल कचरे से जुड़ी शिकायतें सही पाई गई हैं, तो सुधारात्मक कार्रवाई, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही बनती है उन पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और अनुपालन निगरानी का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट प्रकाशित होने तक अस्पताल प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका। बेड की क्षमता, मरीजों की संख्या, संक्रमण नियंत्रण, सफाई व्यवस्था या निरीक्षण के निष्कर्षों पर प्रशासन का आधिकारिक बयान मिलने पर उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।
केईएम अस्पताल मुंबई और महाराष्ट्र का प्रमुख रेफरल केंद्र है। इस अस्पताल में केवल महाराष्ट्र ही नहीं देश के कोने कोने से लोग इलाज कराने के लिए आते है और उनको कोई सुविधा नहीं मिलती छोटे छोटे सामान डॉक्टर मरीजों से बाहर से चिट्ठी लिखकर मंगवाते है और लाखों की फीस अलग से लिया जाता है वार्डो में विराजमान डॉक्टर केवल मरीजों के परिजनों की जेब खाली करने का फार्मूला जानते है इसलिए यहां की व्यवस्थाओं से जुड़े दावे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता और जवाबदेही पर व्यापक सवाल उठाते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिकायतों की निष्पक्ष जांच, निरीक्षण रिपोर्ट का सार्वजनिक खुलासा और आधिकारिक कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी आवश्यक है।



