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June 5, 2026

Right Media Samachar

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मुंबई के कचरा डिपो में लगेगा जंगल: एंटनी लारा की ‘रीरूट’ पहल से 15,000 देसी पेड़ लगेंगे, 12,000 टन CO₂ सोखने का लक्ष्य

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चेतना राजेश राजा

 

 

*मुंबई, 5 जून 2026:* विश्व पर्यावरण दिवस पर मुंबई को बड़ा ग्रीन तोहफा मिला है। एंटनी लारा एनवायरो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने शुक्रवार को ‘रीरूट’ पहल लॉन्च की, जिसके तहत कंजुरमार्ग वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में 15,000 देसी पेड़ लगाकर कचरा डिपो को जिंदा जंगल में बदला जाएगा।

 

एंटनी लारा, एंटनी वेस्ट हैंडलिंग सेल लिमिटेड और ब्राजील की लारा सेंट्रल डे ट्रैटामेंटो डे रेसिडुओस लिमिटेड का जॉइंट वेंचर है। कंजुरमार्ग प्लांट एशिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी है, जो मुंबई के म्युनिसिपल कचरे का लगभग 90% प्रोसेस करती है। इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन मुंबई की मेयर सुश्री रितु राजेश तावड़े, एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर डॉ. विपिन शर्मा, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर किरण दिघावकर, पद्म श्री डॉ. शरद पी. काले और पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. अमिया कुमार साहू की मौजूदगी में हुआ।

 

अभी साइट पर 12,800 पेड़ मौजूद हैं। ‘रीरूट’ के तहत 15,000 और देसी पेड़ लगाए जाएंगे। इनमें नीम, अर्जुन, जामुन, वड़, पीपल, करंज और बांस जैसी सात से ज्यादा क्लाइमेट-रेज़िलिएंट प्रजातियां शामिल होंगी। यह अलग-अलग वेजिटेशन स्ट्रक्चर बायोडायवर्सिटी बढ़ाएगा और मिट्टी की सेहत सुधरेगा।

 

पूरी तरह विकसित होने पर यह अर्बन फॉरेस्ट सालाना लगभग 330 टन CO₂ सोखेगा। अगले 30 सालों में यह 9,000 से 12,000 टन CO₂ स्टोर करेगा, जिससे मुंबई को एक बड़ा लॉन्ग-टर्म कार्बन सिंक मिलेगा। इसके अलावा लोकल टेम्परेचर में 2–5°C की कमी आएगी, नेचुरल डस्ट फिल्ट्रेशन से हवा की क्वालिटी सुधरेगी और पक्षियों, तितलियों व पॉलिनेटर्स की वापसी होगी। गर्मी, धूल और सरफेस वॉटर रनऑफ भी कम होगा।

 

एंटनी वेस्ट ग्रुप के चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, शिजू एंटनी ने कहा, “वेस्ट मैनेजमेंट को अक्सर इस बात से मापा जाता है कि हम क्या हटाते हैं। यह जंगल दिखाता है कि हम क्या बना सकते हैं। 15,000 देसी पेड़ लगाकर हम प्लांट के एक हिस्से को ऐसे इकोसिस्टम में बदल रहे हैं जिससे दशकों तक फायदा होगा।”

 

मुंबई का ग्रीन स्पेस सिर्फ 12.4% है, जो WHO के 25% के मानक से आधा है। अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट से पिछले दो दशकों में सरफेस टेम्परेचर 2.8°C बढ़ा है। PM2.5 का स्तर नेशनल स्टैंडर्ड से दोगुना है। पिछले 30 सालों में MMR में ∼1,500 एकड़ मैंग्रोव खत्म हुए हैं। 2100 तक समुद्र का स्तर 5 मीटर से ज्यादा बढ़ने की आशंका है। रोजाना 7,000 टन से ज्यादा कचरा पैदा करने वाले शहर के लिए यह पहल इकोलॉजिकली जरूरी दखल है।

 

यह इलाका कभी बंजर मैंग्रोव ज़मीन था। आज यह मुंबई का सबसे जरूरी वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर है। अब यह फलते-फूलते शहरी इकोसिस्टम में बदलने को तैयार है। ‘रीरूट’ साबित करता है कि जरूरी शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन में अहम योगदान दे सकता है। यह न सिर्फ शहरों को मैनेज करेगा, बल्कि उन्हें फिर से ज़िंदा भी करेगा।

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