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July 21, 2026

Right Media Samachar

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हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से जगी पुरानी इमारतों के पुनर्विकास की नई उम्मीद: भवानजी

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मुंबई:*नेशनल वेलफेयर फाउंडेशन संस्था के अध्यक्ष और मुंबई के पूर्व उप महापौर बाबुभाई भवानजी ने मुंबई की पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को लेकर मुंबई हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इस फैसले से पुरानी इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ हो गया है। श्री भवानजी ने एक प्रसिद्धि पत्र में कहा है कि लोगों तक फैसले की जानकारी पहुंचाने के लिए आयोजित एक सभा में मुंबई महानगर पालिका की आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिड़े मेडम, म्हाडा के सीईओ श्री मिलिंद शंभरकरजी एवं संबंधित विभाग के सरकारी अधिकारी, अनुभवी एडवोकेट व आर्किटेक्ट विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे।कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री राहुल शेवाले मा. खासदार होंगे । यह सभा कैलाश लच्छी/ दादर ईस्ट रेल्वे स्टेशन के पास, मुंबई मराठी ग्रंथ संग्रहालय मार्ग , आरजू सभागृह रत्नमणि बिल्डिंग 3 माला पर रविवार दिनांक 19 जुलाई, सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक संपन्न होगी।*

 

*भवानजी ने कहा कि मुंबई में पुनर्विकास का इंतज़ार कर रही पुरानी और जर्जर इमारतों में रहने वाले हजारों परिवारों को बॉम्बे हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से बड़ी राहत मिली है। इस निर्णय से वर्षों से रुकी हुई पुनर्विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और खतरनाक इमारतों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद बढ़ी है।*

 

*हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा से समझौता करते हुए जर्जर इमारतों को बार-बार समय बढ़ाना उचित नहीं है। ऐसी इमारतों का पुनर्विकास नियोजित और समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए। साथ ही, कुछ लोगों की अनावश्यक आपत्तियों के कारण अधिकांश निवासियों के हित में चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं को रोका नहीं जाना चाहिए।*

 

 

*भवानजी ने कहा कि इस फैसले का सबसे अधिक लाभ दक्षिण और मध्य मुंबई के गिरगांव, भुलेश्वर, मस्जिद, परेल, लालबाग, दादर, ग्रांट रोड, ताड़देव, कालबादेवी, डोंगरी, नागपाड़ा, भायखला और चिरा बाज़ार जैसे क्षेत्रों की पुरानी सेस (Cessed) इमारतों को मिलेगा। इन इलाकों के हजारों परिवार लंबे समय से पुनर्विकास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।*

 

*इनमें से कई सेस इमारतें 70–80 वर्ष से भी अधिक पुरानी हैं। सरकार ने इनमें से अनेक इमारतों को खतरनाक घोषित कर रखा है। लगभग* **1,000 से अधिक इमारतें अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं, जहाँ छतों से पानी टपकना, दीवारों में दरारें पड़ना और इमारत गिरने का खतरा आम बात हो गई है।*

 

*हाई कोर्ट के इस फैसले से नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुनर्विकास कार्यों में तेजी आएगी। कानूनी बाधाएँ कम होंगी और पुराने इलाकों का आधुनिक एवं सुरक्षित रूप में विकास संभव होगा।*

*भवानजी ने फैसले की प्रमुख बातें बताते हुए कहा की मुंबई की 13,000 से अधिक सेस इमारतों को लाभ मिलेगा।*

*लगभग 2 लाख निवासियोंको राहत मिलेगी।पुरानी इमारतों के पुनर्विकास के लिए इस ऐतिहासिक फैसले से कानूनी अनिश्चितता और बाधाएँ कम होंगी।वर्षों से रुकी हुई पुनर्विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी। जर्जर और खतरनाक इमारतों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।दक्षिण और मध्य मुंबई के शहरी विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।*

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