बेस्ट की बसें लुप्त हो जाएगी ? 110 करोड़ का कर्ज लिया
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वी बी माणिक
मुंबई महानगर पालिका की मुंबई की सडकों पर चलने वाली बेस्ट बसों की हालत काफी दयनीय हो गयी है ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ समय बाद बेस्ट की बसे मुंबई की सडकों से ग़ायब हो जायेगी क्योंकि दिन पर दिन इनके बेड़े में बसों की संख्या क्रम होती जा रही है पहले इस बेड़े में करीब हजारों बसे चलती थी अब करीब 300 के आसपास ही बसे बची हुई है इसके अलावा प्राइवेट कंपनियों की बसों को इस बेड़े में शामिल किया गया जो प्रतिदिन दुर्घटनाएं हो रही है इन बसों में नये नये ड्राईवरों द्वारा ये प्राइवेट बसे को चलाई जाती हैं इनके उपर किसी का कन्ट्रोल नहीं है इनका स्टाफ यात्रियों से बदतमीजी के साथ बर्ताव करते हैं अब दूसरी ओर हालत ये हैं कि कर्मचारियों को पगार देने के लिए 110 करोड़ का कर्ज लेकर इस महिने का पगार दिया जा रहा है अगर ऐसी स्थिति रहीं तो आज jo लोग सत्ता में विराजमान है उनको क्या कहना चाहिये और जो कर्मचारी रिटायर्ड हो चुके हैं उनको देने के लिये पैसे नहीं है वह भी अभी तक प्रतीक्षा में हैं कि कब प्रशासन इनको पैसा दे तब तक बेस्ट का कमरा नहीं खाली नहीं करने वाले हैं वह भी प्रतीक्षा में है कि कब पैसे मिले और हम छोड़कर जाये इसके लिए विधानसभा के इस सत्र में चर्चा भी हो गयी फिर भी कोई सुधार नहीं दिखाई देता है राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से भी बेस्ट अधिकारियों की बैठक भी हुई है पर बेस्ट प्रशासन को केवल आश्वासन ही मिला है अब मुंबई की महापौर रितु तावडे की ओर सभी का ध्यान है कि क्या करती है इस पर मुख्यमंत्री देवेन्द्र भाऊ क्या निर्णय लेते हैं अगर अतिशीघ्र कोई निर्णय नहीं लिया गया तो बेस्ट की बसें मुंबई की सडकों से लुप्त होने मे कोई नहीं रोक सकता पिछली मनपा सरकार ने पूरा बंटाधार करके छले गए अब इनके पास रोने के अलावा कुछ नहीं बचा है


