नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 9833326393 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें

Recent news

April 16, 2026

Right Media Samachar

Hindi News, हिन्दी समाचार, हिंदी न्यूज़, Latest Hindi News, Breaking News, Right Media Samachar

भारतवर्ष में गुरूकुल को खत्म करने के लिए बनाया गया इंडियन एजुकेशन एक्ट – भवानजी

1 min read



मुंबई भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमहापौर बाबूभाई भवानजी ने एक बयान में कहा है कि भारतवर्ष में गुरूकुलों को खत्म करने के तहत वर्ष 1858 में इंडियन एजुकेशन एक्ट बनाया गया। इसकी ड्राफ्टिंग लॉर्ड मैकाले ने की थी लेकिन उसके पहले उसने भारत की शिक्षा व्यवस्था का सर्वेक्षण कराया था। उसके पहले भी कई अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था के बारे में अपनी रिपोर्ट दी थी। अंग्रेजों का एक अधिकारी था जी डब्लू लिटर और दूसरा थाॅमस मुनरो। दोनों ने अलग-अलग इलाकों का अलग-अलग समय सर्वे किया था। 1823 के आस-पास की बात है ,लिटनर, जिसने उत्तर भारत का सर्वे किया था। उसने लिखा था कि यहां 97 फीसदी साक्षरता है, और मुनरो, जिसने दक्षिण भारत का सर्वे किया था, उसने लिखा कि यहाँ तो 100 फीसदी साक्षरता है, और उस समय जब भारत 60/78 में इतनी साक्षरता थी, और मैकॉले का स्पष्ट कहना था कि भारत को हमेशा-हमेशा के लिए अगर गुलाम बनाना है, तो इसकी देशी और सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा। उसकी जगह अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी तभी इस देश में शरीर से हिन्दुस्तानी, लेकिन दिमाग से अंग्रेज पैदा होंगे। और जब इस देश की यूनिवर्सिटी से निकलेंगे तो हमारे हित में काम करेंगे। मैकॉले एक मुहावरा इस्तेमाल कर रहा था, जैसे किसी खेत में कोई फसल लगाने के पहले पूरी तरह जोत दिया जाता है, वैसे ही इसे जोतना होगा और अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लानी होगी। इसलिए उसने सबसे पहले गुरूकुलों को गैरकानूनी घोषित किया। जब गुरूकुल गैरकानूनी हो गए, तो उनको मिलने वाली सहायता, जो समाज की तरफ से होती थी, वो गैरकानूनी हो गई। फिर संस्कृत को गैरकानूनी घोषित किया और इस देश के गुरूकुलों को घूम-घूम कर खत्म कर दिया। उनमें आग लगा दी, उसमें पढाने वाले गुरूओं को उसने मारा-पीटा, जेल में डाला। अंग्रेज हमारी संस्कृति सभ्यता को खत्म करके चले गए, लेकिन आज भी उनकी बनाई हुई शिक्षण पद्धति चल रही है भवानजी ने कहा है कि इस अंग्रेज शिक्षण पद्धति को खत्म करके इंसानियत, संस्कार और देश भक्ति के पाठ पढ़ाने वाली शिक्षण व्यवस्था पद्धति को पुनः लागू किए जाने की जरूरत है।

स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Right Menu Icon