*व्यंजना आर्ट एंड कल्चर सोसायटी की गीता श्लोक एवं कथा-कथन का भव्य समापन समारोह संपन्न*
1 min read
व्यंजना आर्ट एण्ड कल्चर सोसाइटी द्वारा आयोजित गीता श्लोकों पर आधारित तीन दिवसीय कार्यशाला का भव्य समापन समारोह एवं कथा कथन आज नवरस सभागार प्रीतम नगर में हुआ। कार्यशाला का प्रशिक्षण व्यंजना रेपेट्री की विद्यार्थी अभिलाषा भारद्वाज एवं विशाखा कौशिक ने किया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उदय भान सिंह, प्रबंधक, बचपन स्कूल एवं विशिष्ट अतिथि सुशील राय एवं विख्यात चित्रकार रवीन्द्र कुशवाहा रहे। कार्यक्रम में गीता श्लोकों की प्रस्तुति हुई। गायन कलाकारों में शाम्भवी, अभिलाषा, विशाखा, दिव्याभा, मार्तंड, अपेक्षा,मिष्टी, वान्या, विख्यात, वेदान्त आदि शामिल रहे। हारमोनियम पर सूरज कुशवाहा एवं तबले पर आरती श्रीवास्तव रहीं । कथा कथन कार्यक्रम आरंभ करते हुए समन्वय रंग मंडल की सचिव सुषमा शर्मा ने रविंद्र नाथ टैगोर की कहानी एक स्त्री जो 25 वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद अपने पति से अलग होकर अपने जीवन को एक नया क्रांतिकारी स्वरूप देती है वहां से उसको एक पाती (पत्र) लिखती है। इस कहानी के द्वारा नायिका मृणाल द्वारा स्त्री पुरुष में भेद, स्त्रियों को मात्र घर संभालने का एक यंत्र समझ जाना और उसकी बुद्धि और सुंदरता को दरकिनार रख उसको सिर्फ एक वस्तु का दर्जा देना ऐसी समस्याओं को उठाया गया है। इस प्रस्तुति में पार्श्व संगीत अर्णव राय, फोटोग्राफी दीपेंद्र सिंह एवं मंचन सुषमा शर्मा द्वारा निर्देशित एवं अभिनीत था। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए कहानीकार व लेखक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा “कहानियाँ अपने कहे जाने का इंतज़ार करती हैं। ऐसी ही कई कहानियाँ हमें जिंदगी ज़िन्दाबाद करना सिखाती हैं “इत्ती सी ज़िंदगी” एक किताब प्रेमी की कहानी है जो अपने ज़िंदगी में एक बड़ी किताब की दुकान खोलने का स्वप्न अजीबोगरीब स्थिति में पूरा करता है। इसी तरह “बाँस का पौधा” कहानी एक मध्यवर्गीय दम्पत्ति की जद्दोजहद की कहानी है, जो बाँस के पौधे के शुभ अशुभ फलों के इर्द-गिर्द घूमती है। कार्यक्रम का संचालन शाम्भवी शुक्ला ने किया, स्वागत तथा आभार ज्ञापन संस्था के सचिव डॉ मधु रानी शुक्ला ने किया। इस अवसर पर शहर के तमाम गणमान्यों में राधे श्याम तिवारी, डॉ. संतोष मिश्र, राजेश तिवारी, अनिल कुमार शुक्ला एवं श्रेयस शुक्ला इत्यादि उपस्थित रहे।


