मा.खा. डॉ. सुनील बळीराम गायकवाड का “क्रांतिकारी धम्मरत्न” पुरस्कार से भव्य सम्मान
बौद्ध धम्म आंदोलन को नई दिशा देने वाले और समाजसेवा के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले मा.खा. डॉ. सुनील बळीराम गायकवाड को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “क्रांतिकारी धम्मरत्न” पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। “चला बुद्ध के घर” अभियान के अंतर्गत आयोजित इस भव्य समारोह में संत दामाजी पंत सभागार में उनका विशेष सत्कार किया गया।
इस अवसर पर “चला बुद्ध के घर” अभियान के प्रमुख प्रबुद्ध साठे ने डॉ. गायकवाड को शाल, स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। समारोह में उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति, धम्मप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। आयोजकों ने डॉ. गायकवाड के पिछले कई दशकों से किए जा रहे धम्मसेवा कार्यों की सराहना की।
डॉ. गायकवाड ने सांसद रहते हुए लोकसभा में पाली विश्वविद्यालय की स्थापना की महत्वपूर्ण मांग उठाई थी। साथ ही उन्होंने केंद्रीय यूपीएससी की परीक्षा में पाली भाषा को शामिल करने की मांग भी की थी। उनके इन प्रयासों से पाली भाषा और बौद्ध संस्कृति के संरक्षण को नई दिशा मिली है।
पिछले 35 वर्षों से धम्म आंदोलन में सक्रिय डॉ. गायकवाड ने देशभर में बौद्ध विहारों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके मार्गदर्शन में अनेक स्थानों पर धम्मप्रसार को मजबूती मिली है।
वर्तमान में अजिंठा लेणी के समक्ष पाली विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए उनके प्रयास जारी हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर बौद्ध अध्ययन को बढ़ावा मिलने की आशा व्यक्त की जा रही है।
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित होने पर डॉ. गायकवाड के कार्यों की व्यापक सराहना हो रही है और समाज के विभिन्न वर्गों से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। यह सम्मान उनके भविष्य के कार्यों के लिए नई प्रेरणा साबित होगा।


