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June 3, 2026

Right Media Samachar

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प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पूर्वोत्तर रेलवे मंडल चिकित्सालय में टीबी जागरूकता सेमिनार आयोजित,

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वाराणसी :ओ. पी. तिवारी

भारतीय रेलवे प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत राष्ट्रव्यापी क्षय रोग उन्मूलन में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह पहल ‘जन भागीदारी’ के माध्यम से टीबी की रोकथाम, मुफ्त जांच, मरीजों को पोषण सहायता और लोगों को जागरूक करने पर केंद्रित है। इसी क्रम में मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा आर.जे.चौधुरी के नेतृत्व में 20 मई,2026 को पूर्वोत्तर रेलवे मंडल चिकित्सालय,लहरतारा में कर्मचारियों के लिए टीबी जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया । इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा आर.जे.चौधुरी,अपर मुख्य चिकित्सा अधिक्षक डा आर.आर.सिंह,डा नीरज,डा कल्पना दूबे,डा ए.के.सिंह,वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डा बी.वी.अमरनाथ,डा ममता सिंह समेत मंडल चिकित्सालय के सभी चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ उपस्थित थे ।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ मंडल चिकित्सा अधिकारी डा बी.वी.अमरनाथ ने बताया की टी बी (ट्यूबरकुलेसिस) शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, फेफड़ों में होने वाला टीबी सबसे आम प्रकार का होता है। कोरोना की तरह फेफड़ों में होने वाला टीबी भी खांसी और छींक के द्वारा एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।ट्यूबरकुलोसिस का खतरा उन लोगों को सबसे अधिक होता है जो जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी जैसे कि एड्स या डायबिटीज आदि होती है। साथ ही, जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उन्हें भी इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। ट्यूबरकुलोसिस मुख्यता दो प्रकार के होते हैं जिसमें लेटेंट ट्यूबरकुलोसिस और सक्रिय ट्यूबरकुलोसिस शामिल हैं। ट्यूबरक्लोसिस कारण पर ध्यान देकर कुछ सावधानियां बरती जायें तो इसका खतरा कम हो सकता है। शरीर में ट्यूबरक्लोसिस का निदान करने के लिए टीबी स्किन टेस्ट और टीबी ब्लड टेस्ट का उपयोग किया जाता हैं। ट्यूबरक्लोसिस के मरीज को मास्क पहनकर रखना चाहिए ताकि दूसरों को यह रोग न फैले। साथ ही, मरीज को जगह-जगह थूकने के बजाय एक पॉलीथिन में थूकना चाहिए एवं पब्लिक चीजों का कम से कम उपयोग करना चाहिए ताकि दूसरे इस संक्रमण की चपेट में न आएं। इलाज से टीबी लगभग हमेशा के लिए ठीक हो सकती है। एंटीबायोटिक्स का एक कोर्स आमतौर पर 6 महीने तक लेने की आवश्यकता होगी। कई अलग-अलग एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता है, क्योंकि टीबी के कुछ रूप कुछ एंटीबायोटिक दवाओं के लिए प्रतिरोधी होते हैं।

सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा आर.जे.चौधुरी ने बताया रेलवे अस्पतालों और हेल्थ यूनिट्स में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी की मुफ्त जांच और उच्च-गुणवत्ता वाला मुफ्त इलाज प्रदान किया जाता है। रेल यात्रियों और रेलवे कॉलोनियों में रहने वाले कमजोर एवं संवेदनशील वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। टीबी की रोकथाम के लिए कर्मचारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित आहार के प्रति जागरूक किया जाता है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान भारत सरकार द्वारा 9 सितंबर 2022 को शुरू किया गया एक प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक देश से तपेदिक (टीबी) को पूरी तरह से खत्म करना है। खुले में थूकना टी. बी.संक्रमण को फैलाता है और आपके परिवार को खतरे में डालता है। अतः खुले में न थूकें, स्वच्छ वातावरण बनाएं और अपनों को सुरक्षित रखें।

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