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July 21, 2026

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वोट का अधिकार और प्रशासनिक सुस्ती: एसआईआर सर्वे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत

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लेखक :- पत्रकार यूसुफ़ राना :-9004200983

 

मुंबई। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। यही वोट सरकार बनाता है, नीतियां तय करता है और जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाता है। इसलिए मतदाता सूची का सही और समय पर पुनरीक्षण किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। लेकिन महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान सामने आ रही प्रशासनिक सुस्ती ने लाखों मतदाताओं की चिंता बढ़ा दी है।

निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर प्रपत्र वितरित करने और मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई है। मगर कई क्षेत्रों से जो तस्वीर सामने आ रही है, वह चिंताजनक है। अनेक स्थानों पर दस दिन बीत जाने के बाद भी केवल 20 से 40 प्रतिशत प्रपत्र ही वितरित हो पाए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने प्रपत्र का इंतजार कर रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि अभी केवल प्रपत्र वितरण का काम चल रहा है। इसके बाद नागरिकों को प्रपत्र भरने, आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने, जमा करने और फिर उनकी जांच एवं स्कैनिंग की प्रक्रिया से गुजरना होगा। यदि यह पूरी प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी नहीं होती है, तो लाखों पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

लोगों की शिकायत है कि कई स्थानों पर बीएलओ से संपर्क नहीं हो पा रहा है। फोन कॉल का जवाब नहीं दिया जा रहा है और आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इससे आम नागरिकों में बेचैनी और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सबसे अधिक परेशानी उन वर्गों को हो रही है जो पहले से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन और गृहिणियां केवल एक प्रपत्र प्राप्त करने या अपनी जानकारी सत्यापित कराने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। किसी भी संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

यह मामला किसी एक व्यक्ति, दल या क्षेत्र का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल अधिकार से जुड़ा हुआ है। यदि कोई पात्र नागरिक प्रशासनिक देरी या लापरवाही के कारण मतदाता सूची से बाहर रह जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकार पर सीधा आघात है।

आवश्यकता इस बात की है कि निर्वाचन आयोग, संबंधित अधिकारी और स्थानीय प्रशासन तत्काल इस दिशा में प्रभावी कदम उठाएं। प्रपत्र वितरण में तेजी लाई जाए, बीएलओ के कार्य की नियमित निगरानी की जाए, शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और सहायता केंद्र सक्रिय किए जाएं तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।

लोकतंत्र केवल चुनाव कराने का नाम नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी और उसके वोट के सम्मान का नाम है। इसलिए एसआईआर सर्वे में गति, पारदर्शिता और जनसुविधा सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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