अजब तेरा जलवा गजब तेरा खेल सारे धुरंधर हो गए फेल फडणवीस पुलिस में पारदर्शिता कब
मुंबई महाराष्ट्र के पुलिस निरीक्षक और अन्य कर्मियों के ट्रांसफर की लिस्ट शनिवार देर रात जारी किया गया जिसमें पारदर्शिता दिखाई नहीं पड़ी ईमानदारी का ढोल पीटने वाली महाराष्ट्र सरकार के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के अधीन कार्यरत प्रदेश के पुलिस महासंचालक ने जो लिस्ट जारी किया है उससे ऐसा प्रतीत हुआ है कि पुलिस विभाग में सुधार की संभावना है ही नहीं शहर हो या रेलवे इसमें सुधार कब होगा यह बड़ा प्रश्न है
पहले रेलवे में क्या हो रहा है
पिछले करीब 12 वर्षों से रेलवे यानी जीआरपी में जो सिपाही से लेकर उप निरीक्षक तक के लोग पुलिस स्टेशनों में कार्यरत थे जो अब डीजी रेलवे या अन्य विभागों में तबादला करवाने के बाद ये वापस पुलिस स्टेशन में नहीं आना चाहते क्या कारण है ? क्योंकि इनकी9 काम नही करना है अधिकारियों की चापलूसी करना है इनको बीएनएस का भी ज्ञान नहीं है सप्ताह में दो दिन छुट्टी मिलती है अन्य सार्वजनिक छुट्टियों में ये ड्यूटी नहीं करते इसकी जानकारी माँगने पर आज तक डीजी रेलवे प्रशांत बुरडे नहीं दे पाए और इन्हीं के कार्यालय में कार्य रत पुलिस कर्मी पिछले करीब 12 वर्षों से कार्य कर रहे है ये कौन सा ऐसा कार्य कर रहे है जो पुलिस विभाग को गर्व है कितने रिवॉर्ड लेकर आये है जो नकारा है साबित हो रहे है और विभाग में आंतरिक कलह भी बढ़ता जा रहा है प्रशांत को डीजी बनना था पर फडणवीस ने नहीं बनाया दाते को डीजी बनाया गया पुलिस विभाग पहले अपने घर को अंदर से सुधारे फिर सुरक्षा की बात करे तो अच्छा लगेगा रेलवे के करीब 9 निरीक्षक की जगह केवल 3 निरीक्षक आए है वह भी गारंटी नही कि आयेंगे ही क्योंकि रेलवे कोई जल्दी करना नही8 चाहता
अब बात करे शर और गांव की
अब शहर और ग्रामीण विभाग काफी असुरक्षित है कोई भी घटना घटित हो रही है उसमें आरोपी जल्दी पकड़े नहीं जाते है कुछ घटनाओं को छोड़कर अधिकांश में स्थिति ठीक नहीं है यहाँ भी ट्रांसफर के लिए बड़े सोर्स की आवश्यकता होती है अब तो ज्यादा पुलिसकर्मी ऑफिसों में ही कार्य करना चाहते है जो ईमानदारी आईपीएस अधिकारी है वो ठीक से कार्य नही कर पा रहे है अब तो यह भी है कि कौन सा अधिकारी किस नेता का शिष्य है उस हिसाब से उसको पोस्टिंग दी जाती है खैर यह तो पुरानी परंपरा है उसका निर्वाह यह भी कर रहे है तो इसमें गलत क्या है
सुधार कब होगा
सभी की तरह हम भी कार्य करेंगे तो सुशासन का नारा सरकार के9 नहीं देना चाहिए अधिकांश भ्रष्टाचारी तो सरकार के साथ मिल गए है यह राजनीति है इसमें ईमानदारी की कोई परिभाषा नहीं होती कभी अपराधी इधर कभी उधर यह तो चलता रहता है और इन्हीं के चट्टे बट्टे ये पुलिस वाले भी है बिना रिश्वत के की काम पुलिस नहीं करती इसको सुधारने के लिए कोई फार्मूला जल्दी से लेकर आना होगा नहीं तो कांग्रेस और भाजपा में कोई अंतर नहीं रह जाएगा


