इमारतों के फर्जीवाड़ा को लेकर विरार पुलिस द्वारा खुलासे बाद हरकत में आयी मनपा
पहले 55, अब 117 इमारत अवैध घोषित
आरती हॉस्पिटल जैसे अवैध इमारतों को क्यों किया जा रहा अनदेखा ? उठा सवाल!
नालासोपारा : वसई विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में लगभग पिछले 15 वर्षो में हजारों की संख्या में अवैध निर्माण कर के इमारतों को बनाया गया है और आज भी उस प्रकार की इमारतों का निर्माण कार्य जारी है। पिछले दिनों में विरार पुलिस स्टेशन की टीम द्वारा एक बहुत बड़ा फर्जी मामले का खुलासा किया गया, जिसमें 55 इमारतों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए तैयार कर ग्राहकों को बेचा गया है और उस मामले में 04 आरोपी गिरफ्तार भी किए गए हैं। विरार पुलिस की कार्रवाई बाद वसई विरार शहर मनपा हरकत में आ गई और अब 55 की जगह 117 इमारतों को मनपा द्वारा अवैध घोषित किया है और शहर के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में अन्य निर्माणको के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया गया है। लेकिन अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि मनपा अधिकारियों द्वारा एक तरफा कार्रवाई क्यों ? जबकि वसई विरार शहर मनपा प्रभाग समिति (एफ) कार्यक्षेत्र नालासोपारा पूर्व संतोष भवन स्थित आरती हॉस्पिटल जैसे कई इमारतें आज भी खड़ी है और उन निर्माणको के खिलाफ मनपा के अधिकारी कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहे है। बता दे कि वसई विरार शहर महानगरपालिका का यह दोहरा रवैया माना जा रहा है।
बता दे कि प्रभाग समिति (एफ) कार्यक्षेत्र संतोष भवन स्थित आरती हॉस्पिटल के खिलाफ कई शिकायतें दी गई है और कार्रवाई का आश्वासन भी मिला है बस उस पर कार्रवाई नहीं किया जा रहा है। मनपा अधिकारियों के इस रवैए से साफ जाहिर हो रहा है कि विभाग अधिकारियों की कहीं ना कहीं अवैध निर्माणक के साथ साठगांठ है। मनपा के कार्य रवैए से भ्रष्टाचार की बू भी आ रहा है जिस कारण मनपा के विभाग अधिकारी आरती हॉस्पिटल और उसके बगल में बने एक अन्य इमारत पर कार्रवाई करने में असफल हैं। बता दे कि आरती हॉस्पिटल ग्राउंड +03 , और उसके बगल में ग्राउंड + 02 का अवैध इमारत बनाया गया है जिसके खिलाफ बनने से लेकर तैयार होने तक शिकायत दिया गया इसके बावजूद भी प्रभाग समिति एफ के जिम्मेदार अधिकारी और मुख्यालय के उच्च अधिकारी कार्रवाई से दूर रहे। अब सवाल यह उठ रहा है विरार के मामले से पूरे शहर में हड़कंप मचा है तो फिर आरती हॉस्पिटल के निर्माणक को कार्रवाई के बीच से दरकिनार क्यों किया जा रहा है ? वसई विरार शहर मनपा आयुक्त से शहर की जनता इसका जवाब मांग रही है।

