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April 16, 2026

Right Media Samachar

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विरार पुलिस द्वारा 55 इमारतों के फर्जी दस्तावेजो का खुलासा करने के बाद हरकत में आई शहर की मनपा

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अब प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों से कर रही अपील

विशेष संवाददाता
वसई : विरार पुलिस स्टेशन में प्रेस कान्फ्रेस के माध्यम से शहर के एक बड़े फर्जी मामले का पुलिस द्वारा खुलासा किया गया, जिसमें इमारत निर्माण से जुड़े अन्य विभाग भी रडार पर हैं। जिसके बाद वसई विरार शहर मनपा हरकत में आई और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नागरिकों से अपील करती दिखी है। बता दे कि फर्जी में मामले में कुल 55 इमारतों का जिक्र है और हजार से अधिक मनपा सहित अन्य विभाग के लेटर हेड भी मिले है इसके साथ साथ कई विभाग का रब्बर स्टैंप भी बरामद हुआ है। बता दे कि मंगलवार देर शाम को वसई विरार शहर महानगरपालिका ने 55 इमारतों को लेकर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कार्रवाई की बात कही है। मनपा ने बताया है कि, मूल शिकायतकर्ता ने प्रस्तुत किया है कि वसई विरार शहर महानगरपालिका वार्ड समिति “सी” चंदनसर क्षेत्र मौजे कोपरी सर्वे नं. 137 हिस्सा नं.2 ए,इस जमीन पर बिना अनुमति के अनाधिकृत भवन रुद्रांश ए और बी विंग का निर्माण करने की शिकायत थी।शिकायत के मुताबिक उक्त अनाधिकृत इमारत की तीसरी, चौथी और पांचवीं मंजिल पर जहां कोई आवास नहीं था,पुलिस बंदोबस्त में 20 जुलाई 2022 व 21 जुलाई 2022 को प्रभाग समिति सहायक आयुक्त ने निष्कासित की कार्रवाई कर,इमारत कुछ फ्लैटों को सीलबंद कर दिया गया था। मे रुद्रांश रियलटर्स, परिसर के डेवलपर और मालिक दिलीप बेनवंशी ने मनपा द्वारा लगाई गई सील को तोड़कर उक्त फ्लैट का दोबारा निर्माण कर वहां रहने वालों को रहने के लिए दे दिया था। इस बीच, नगर रचना विभाग के माध्यम से सत्यापन के बाद यह निर्धारित हुआ कि उक्त इमारतों का निर्माण फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके किया गया था। उसके बाद वार्ड समिति सहायक आयुक्त के माध्यम से मे रुद्रांश रियल्टर्स के डेवलपर और भूमि मालिक दिलीप बेनवंशी के खिलाफ एमआरटीपी कानून के तहत और फर्जी दस्तावेज बनाकर नागरिकों और मनपा के साथ धोखाधड़ी की,विरार पुलिस स्टेशन में गुन्हा रजि. क्र. 152/2023 दर्ज किया गया है। संबंधित जांच पुलिस विभाग द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में उक्त अनाधिकृत निर्माण प्रकरण में दावा क्रमांक.368/2022 सिविल कोर्ट,वसई में दायर किया गया है व अदालत ने उक्त निर्माण के खिलाफ वही निषेधाज्ञा पारित की है। हालांकि,मनपा के पैनल वकीलों के माध्यम से निषेधाज्ञा आदेश को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग ने इसकी जांच की तो पता चला कि फर्जी रेरा/दस्त का रजिस्ट्रेशन कराकर 55 और अनाधिकृत इमारतों का निर्माण कराया गया है। 7 अगस्त को पुलिस विभाग के माध्यम से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी।मनपा ने भी इस पर तत्काल संज्ञान लिया व आयुक्त के निर्देशानुसार उपायुक्त (अनधिकृत-बांधकाम.) सभी सहायक आयुक्त को उक्त 55 भवन व इसी प्रकार यदि वार्ड अंतर्गत अन्य भवनों का निर्माण भी ऐसे ही फर्जी दस्तावेजों से किया गया है तो संबंधित अनधिकृत बिल्डरों के खिलाफ ऐसी सभी इमारतों का तुरंत सर्वेक्षण करें। एमआरटीपी व आपराधिक धारा के तहत मामला दर्ज करने और पुलिस बुलाकर निष्कासन की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस विभाग के समन्वय से एमआरटी पी और फौजदारी धारा के तहत अपराध दर्ज करने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी,और इस प्रकार अनधिकृत इमारतों का निर्माण करने वाले सभी बिल्डरों के खिलाफ एम.आर.टी. पी व फौजदारी के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।साथ ही नागरिकों द्वारा देखा गया मकान/दुकान आदि खरीद व बिक्री के लेनदेन में प्रवेश करने से पहले, इमारतों या फ्लैटों की वैधता को मनपा के नगर रचना विभाग द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यह अपील मनपा की ओर से की गई है। अब सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस द्वारा फर्जी मामले के उजागर बाद ही मनपा हरकत में क्यों आई ? और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर क्या साबित करना चाहती है ? यह भी एक जांच का विषय बन गया है।

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